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आज भी रूह कंपा जाती है 11 मार्च 2011 को जापान में आई भयानक सुनामी की ये तस्वीरें

Published : Mar 11, 2026 11:13 am IST,  Updated : Mar 11, 2026 11:20 am IST
जापान में 684 ईस्वी से अब तक 143 से ज्यादा रिकॉर्डेड सुनामी आ चुकी है। इसके चलते 1.3 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। जापान दुनिया का सबसे ज्यादा सुनामी प्रभावित देश है।
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जापान में 684 ईस्वी से अब तक 143 से ज्यादा रिकॉर्डेड सुनामी आ चुकी है। इसके चलते 1.3 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। जापान दुनिया का सबसे ज्यादा सुनामी प्रभावित देश है।
2011 की सुनामी ने फुकुशिमा दाइइची न्यूक्लियर प्लांट को तबाह कर दियाथा, जिससे रेडिएशन लीक हुआ। यह चेर्नोबिल के बाद सबसे बड़ा परमाणु हादसा माना जाता है।
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2011 की सुनामी ने फुकुशिमा दाइइची न्यूक्लियर प्लांट को तबाह कर दियाथा, जिससे रेडिएशन लीक हुआ। यह चेर्नोबिल के बाद सबसे बड़ा परमाणु हादसा माना जाता है।
जापान में साल 2011 की तोहोकु सुनामी सबसे विनाशकारी थी। 11 मार्च 2011 को 9.0-9.1 तीव्रता के भूकंप से उत्पन्न सुनामी में लगभग 20,000 लोग मारे गए या लापता हुए। इस दौरान 40 मीटर तक ऊंची लहरें उठी थीं।
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जापान में साल 2011 की तोहोकु सुनामी सबसे विनाशकारी थी। 11 मार्च 2011 को 9.0-9.1 तीव्रता के भूकंप से उत्पन्न सुनामी में लगभग 20,000 लोग मारे गए या लापता हुए। इस दौरान 40 मीटर तक ऊंची लहरें उठी थीं।
वहीं इससे पहले 15 जून 1896 को आई सनरिकु सुनामी में 22,000 से ज्यादा मौतें हुईं। लहरों की ऊंचाई 38 मीटर तक पहुँची थी। यह "Tsunami Earthquake" थी जिसमें भूकंप के झटके कम महसूस हुए, इसलिए लोग भाग नहीं पाए।
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वहीं इससे पहले 15 जून 1896 को आई सनरिकु सुनामी में 22,000 से ज्यादा मौतें हुईं। लहरों की ऊंचाई 38 मीटर तक पहुँची थी। यह "Tsunami Earthquake" थी जिसमें भूकंप के झटके कम महसूस हुए, इसलिए लोग भाग नहीं पाए।
जापान में अब तक की सबसे ऊँची सुनामी लहर 90 मीटर (1741 में) मानी जाती है
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जापान में अब तक की सबसे ऊँची सुनामी लहर 90 मीटर (1741 में) मानी जाती है
जापान में दुनिया की सबसे उन्नत सुनामी वार्निंग सिस्टम, समुद्री दीवारें और इवैकुएशन ड्रिल्स हैं। फिर भी 2011 में कई जगह दीवारें फेल हो गईं, क्योंकि लहरें अपेक्षा से ज्यादा ऊंची थीं। इन लहरों ने पूरे शहर को सफाचट मैदान बना दिया। सारे मकान बह गए।
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जापान में दुनिया की सबसे उन्नत सुनामी वार्निंग सिस्टम, समुद्री दीवारें और इवैकुएशन ड्रिल्स हैं। फिर भी 2011 में कई जगह दीवारें फेल हो गईं, क्योंकि लहरें अपेक्षा से ज्यादा ऊंची थीं। इन लहरों ने पूरे शहर को सफाचट मैदान बना दिया। सारे मकान बह गए।
जापान में "नामाये" नाम की पत्थर की पट्टिकाएं सदियों से लगाई जाती हैं, जिन पर लिखा होता है- "यहां से नीचे घर मत बनाना"। ये 869 के जोगन सुनामी जैसी पुरानी घटनाओं की याद दिलाती हैं।
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जापान में "नामाये" नाम की पत्थर की पट्टिकाएं सदियों से लगाई जाती हैं, जिन पर लिखा होता है- "यहां से नीचे घर मत बनाना"। ये 869 के जोगन सुनामी जैसी पुरानी घटनाओं की याद दिलाती हैं।
 जापान सरकार ने हाल के वर्षों में ननकाई ट्रफ में मेगा-क्वेक (8-9 तीव्रता) की चेतावनी जारी की है, जिसमें 3 लाख तक मौतें और लाखों करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। सुनामी यहां भी बहुत बड़े पैमाने पर आ सकती है।
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जापान सरकार ने हाल के वर्षों में ननकाई ट्रफ में मेगा-क्वेक (8-9 तीव्रता) की चेतावनी जारी की है, जिसमें 3 लाख तक मौतें और लाखों करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। सुनामी यहां भी बहुत बड़े पैमाने पर आ सकती है।
जापान ने सुनामी से सीखा है और दुनिया को भी सिखाया है कि तैयारी कितनी जरूरी है, लेकिन प्रकृति की ताकत कभी-कभी अनुमान से परे होती है। इसलिए बड़ी तबाही हो जाती है।
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जापान ने सुनामी से सीखा है और दुनिया को भी सिखाया है कि तैयारी कितनी जरूरी है, लेकिन प्रकृति की ताकत कभी-कभी अनुमान से परे होती है। इसलिए बड़ी तबाही हो जाती है।
11 मार्च 2011 की सुनामी में मारे गए लोगों की यादें आज के दिन एक बार फिर लोगों के जेहन में ताजा हो गई हैं, जिसने जापान में प्रलय मचा दिया था।
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11 मार्च 2011 की सुनामी में मारे गए लोगों की यादें आज के दिन एक बार फिर लोगों के जेहन में ताजा हो गई हैं, जिसने जापान में प्रलय मचा दिया था।
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