गुजरात के जामनगर में दशहरा पर्व पर राजपूत समाज ने शस्त्र पूजन किया। दशहरा पर्व के अवसर पर जामनगर राजपूत युवा संघ के तत्वावधान में क्षत्रिय समाज की परंपरा निभाई गई। शस्त्र पूजन के भव्य आयोजन के अवसर पर राजपूत समाज के लोगों ने मां आशापुरा माता की आराधना की। इस दौरान अपने पारंपरिक शस्त्रों की विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना भी की।
किसी ने तलवार तो किसी ने खंजर की पूजा की
इस आयोजन में समाज के युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शस्त्र पूजन के दौरान किसी ने तलवार, किसी ने खंजर तो किसी ने रिवॉल्वर की पूजा कर वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया। राज्य शिक्षा मंत्री रीवाबा जडेजा ने भी अपनी रिवॉल्वर का पूजन कर इस परंपरा में भाग लिया।
असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है दशहरा पर्व
दशहरा पर्व का महत्व और शुभकामनाएं दशहरा पर्व अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। इस अवसर पर प्रभु श्रीराम और मां आशापुरा माता को नमन करते हुए नगरवासियों एवं समाज के लोगों को दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दी गईं।
क्षत्रिय समाज की गौरवशाली परंपराओं को किया जाता है याद
कार्यक्रम के माध्यम से क्षत्रिय समाज की गौरवशाली परंपराओं, संस्कृति और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण को याद किया गया। साथ ही युवा पीढ़ी से मूल्य-आधारित और ज्ञान-आधारित शिक्षा ग्रहण करने तथा देश की उन्नति और प्रगति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
रीवाबा जडेजा ने दशहरे के पर्व की दी शुभकामनाएं
कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए गुजरात सरकार में शिक्षा मंत्री रीवाबा जडेजा ने दशहरा पर्व पर शस्त्र पूजन की परंपरा को आस्था और विश्वास से जुड़ा बताते हुए समाज के लोगों को पर्व की शुभकामनाएं दीं।
राजपूत समाज में शस्त्र पूजन की सदियों पुरानी परंपरा
बता दें कि राजपूत समाज में दशहरे के पर्व पर शस्त्र पूजन की सदियों पुरानी परंपरा रही है। इस दिन राजपूत परिवारों और क्षत्रिय समाज के लोग पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ तलवार, भाला और अन्य शस्त्रों की पूजा करते हैं। इस परंपरा को शक्ति, साहस, वीरता और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजन करने से विजय और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
हरदीप भोगल की रिपोर्ट
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