अहमदाबाद: अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एक दिन पहले एक बेहद हाई-टेक आधार कार्ड फ्रॉड का पर्दाफाश किया है, जिसमें डीपफेक वीडियो और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का उपयोग करके बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (biometric authentication) को बायपास किया गया। यह अपनी तरह का पहला बड़ा मामला है।
Modus Operandi- डीपफेक और AI
जालसाजों ने पीड़ित की स्थिर फोटो (static photo) को AI टूल्स का उपयोग करके एक एनिमेटेड वीडियो में बदल दिया, जिसमें आंखों की हरकत (blinking) भी थी। इस डीपफेक वीडियो का उपयोग आधार के 'लाइवनेस डिटेक्शन' (liveness detection) को धोखा देने के लिए किया गया।
बायोमेट्रिक में बदलाव
इन लोगों ने आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक डेटा को अवैध रूप से बदल दिया और OTP बायपास किया, यानी मोबाइल नंबर बदलकर, उन्होंने बैंक OTP अपने पास मंगवाए, जिससे पीड़ित को अलर्ट नहीं मिला।
CSC का दुरुपयोग
गिरोह ने कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के ऑपरेटरों के साथ मिलकर काम किया और आधार अपडेट किट का अवैध उपयोग किया।
फ्रॉड का मकसद
इस तकनीक का उपयोग करके उन्होंने एक व्यवसायी के नाम पर लोन लिया और बैंक खाते खोले।
केस की मुख्य बातें
पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया है - कनुभाई परमार, आशीष वनंद, मोहम्मद कैफ पटेल और दीप गुप्ता। इसके मास्टरमाइंड आशीष वनंद, जो पहले UIDAI की एक निजी एजेंसी में काम करता था, को आधार सिस्टम की गहरी जानकारी थी।
अहमदाबाद के थलतेज के एक व्यवसायी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनका आधार लिंक्ड नंबर बदल दिया गया है और उन्हें OTP नहीं मिल रहे हैं।
फ्रॉड करने वालों ने शिकार के नाम पर 25,000 रुपये का लोन लिया था।
साइबर क्राइम ब्रांच ने तकनीकी निगरानी और मानवीय इंटेलिजेंस के आधार पर सभी चार आरोपियों को पकड़ा।
यह मामला दर्शाता है कि बायोमेट्रिक सुरक्षा को अब AI के जरिए धोखा दिया जा सकता है।
पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे UIDAI की वेबसाइट या mAadhaar ऐप के जरिए अपने आधार कार्ड में बायोमेट्रिक डेटा को लॉक (lock) रखें। जब भी किसी सेवा के लिए उपयोग करना हो, तो उसे अस्थायी रूप से अनलॉक करें।