खाना खाने के बाद सीने में जलन होना एक ऐसी समस्या है, जिससे आज के समय में ज्यादातर लोग खाना खाने के बाद छाती में जलन को अक्सर लोग गैस या अपच समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन हर बार ऐसा करना आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। डॉ अभिनंदन मिश्र, वरिष्ठ सलाहकार गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, फोर्टिस अस्पताल मानेसर बता रहे हैं कि खाने के बाद छाती में जलन क्यों होती है।
क्या कहते हैं डॉक्टर
कई मामलों में इसका कारण गैस्ट्रोएसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज यानी GERD हो सकता है। इसमें पेट की अम्लीय सामग्री वापस भोजन नली में पहुंचती है, जिससे छाती के बीचों बीच जलन, मुंह में खट्टा पानी आना या खाना वापस ऊपर आने जैसी परेशानी हो सकती है।खाने के बाद यह समस्या इसलिए बढ़ सकती है क्योंकि पेट भरने पर पेट के भीतर दबाव बढ़ता है। बहुत अधिक खाना, ऑयली फूड, कैफीन, चॉकलेट, देर रात भोजन करना और भोजन के तुरंत बाद लेटना भी रिफ्लक्स को बढ़ा सकता है।
सीने में जलन के मुख्य कारण
मसालेदार और तला-भुना खाना: अधिक तेल, मिर्च वाले भोजन पेट में एसिड का उत्पादन बढ़ा देते हैं और वॉल्व को ढीला कर देते हैं।
खाने के तुरंत बाद लेटना: भोजन करने के तुरंत बाद बिस्तर पर जाने से गुरुत्वाकर्षण एसिड को वापस ऊपर आने में मदद करता है।
ओवरईटिंग: एक ही बार में बहुत अधिक खा लेने से पेट पर दबाव बढ़ता है, जिससे एसिड ऊपर की ओर आ जाता है।
कैफीन और सिगरेट/शराब: चाय, कॉफी, वातित पेय, सिगरेट और शराब का सेवन LES वॉल्व को कमजोर करता है।
मोटापा और पेट का दबाव: अत्यधिक वजन या गर्भावस्था के दौरान पेट के अंदरूनी दबाव के कारण भी एसिड रिफ्लक्स बढ़ जाता है।
क्यों नहीं करना चाहिए इग्नोर
कभी कभी होने वाली जलन हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होती, लेकिन सप्ताह में दो या उससे अधिक बार होने वाली परेशानी को केवल गैस मानकर छोड़ना सही नहीं है। लंबे समय तक अनियंत्रित GERD भोजन नली में सूजन, घाव, संकुचन और कुछ मामलों में बैरेट्स एसोफैगस जैसी स्थिति पैदा कर सकता है, जो आगे चलकर कैंसर के जोखिम से जुड़ी है। भोजन और सोने के बीच कम से कम दो से तीन घंटे का अंतर रखना, जरूरत से ज्यादा भोजन से बचना और ऐसे खाद्य पदार्थों की पहचान करना जिनसे बार बार जलन होती है, लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।