तनाव शरीर का सबसे बड़ा दुश्मन बनता जा रहा है। भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव (Stress) लगभग हर व्यक्ति के जीवन का हिस्सा बन चुका है। नौकरी का दबाव, आर्थिक चुनौतियां, पारिवारिक जिम्मेदारियां, रिश्तों में तनाव, सोशल मीडिया का प्रभाव और फ्यूचर की चिंताएं लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहे हैं। यदि तनाव लंबे समय तक बना रहे, तो यह केवल मन ही नहीं बल्कि दिमाग की कार्यप्रणाली को भी प्रभावित करने लगता है। सीनियर मनोचिकित्सक डॉक्टर गौरव गुप्ता (तुलसी हेल्थकेयर, गुरुग्राम) से जानते हैं तनाव का दिमाग पर क्या असर होता है?
तनाव के समय शरीर में कॉर्टिसोल, जो एक स्ट्रेस हार्मोन होता है और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। थोड़े समय के लिए यह शरीर को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने में मदद करता है, लेकिन जब तनाव लगातार बना रहता है, तो यही हार्मोन दिमाग की कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डालने लगते हैं। इससे सोचने-समझने, निर्णय लेने, याददाश्त और भावनाओं को नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
याददाश्त और एकाग्रता पर असर
लगातार तनाव का सबसे बड़ा प्रभाव याददाश्त और एकाग्रता पर पड़ता है। व्यक्ति छोटी-छोटी बातें भूलने लगता है, किसी काम पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता और निर्णय लेने में कठिनाई महसूस करता है। कई लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह लंबे समय तक बने तनाव का संकेत हो सकता है।
मानसिक बीमारियों का खतरा बढ़ता है
अनियंत्रित तनाव चिंता (Anxiety), अवसाद (Depression), पैनिक अटैक और नींद से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। लगातार तनाव में रहने वाले लोगों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, निराशा और सामाजिक दूरी बढ़ने लगती है। यदि समय रहते इसका समाधान न किया जाए, तो यह व्यक्ति के पारिवारिक, सामाजिक और पेशेवर जीवन को भी प्रभावित कर सकता है।
नींद होती है खराब
तनाव का सीधा असर नींद पर पड़ता है। कई लोगों को रात में नींद नहीं आती, बार-बार नींद खुल जाती है या सुबह उठने पर भी थकान महसूस होती है। पर्याप्त नींद न मिलने से दिमाग को आराम और खुद को पुनर्स्थापित करने का समय नहीं मिल पाता, जिससे तनाव का ये चक्र और भी गहरा हो जाता है।
शरीर पर तनाव का असर
मानसिक तनाव केवल दिमाग तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक तनाव रहने से हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, मधुमेह, पाचन संबंधी समस्याएं, सिरदर्द, माइग्रेन और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली जैसी शारीरिक समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
कब समझें कि तनाव गंभीर हो गया है?
यदि दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक लगातार उदासी, अत्यधिक चिंता, किसी काम में मन न लगना, बार-बार गुस्सा आना, नींद या भूख में बदलाव, कामकाज की क्षमता में कमी या रोज की जिम्मेदारियां निभाने में कठिनाई महसूस हो रही है, तो इसे सामान्य तनाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
तनाव से बचने के आसान उपाय
- रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें
- नियमित रूप से पैदल चलने की आदत बनाएं
- रात में कम से कम 7–8 घंटे की अच्छी नींद लें
- योग, ध्यान और गहरी सांस लेने का अभ्यास करें
- परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं
- अपनी भावनाओं को किसी के साथ शेयर करें
- मोबाइल और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करें
- संतुलित आहार लें
- कैफीन, शराब और नशे से दूर रहें
- काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाएं
- जरूरत पड़ने पर ‘ना’ कहना भी सीखें