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पीडियाट्रिशियन ने बताया नवजात शिशु को कब देना चाहिए पानी? यहां जान लें पेरेंट्स

 Written By: Ritu Raj
 Published : Aug 29, 2026 11:19 am IST,  Updated : Aug 29, 2026 11:19 am IST

नवजात शिशु को देखभाल की बहुत जरूरत होती है। क्योंकि उनके लिए मां का दूध ही पोषण का एकमात्र सोर्स होता है। लेकिन पेरेंट्स के मन में एक सवाल अक्सर आता है कि बच्चों को पानी कब देना चाहिए? अगर आपके मन में भी ये सवाल है तो डॉक्टर रवि मलिक बता रहे हैं सही समय।

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पीडियाट्रिशियन ने बताया नवजात शिशु को कब देना चाहिए पानी? यहां जान लें पेरेंट्स Image Source : MAGNIFIC

घर में नन्हे मेहमान का आना किसी भी माता-पिता के लिए जीवन का सबसे सुखद और भावुक अनुभव होता है। हालांकि, इस अपार खुशी के साथ-साथ ढेरों नई जिम्मेदारियां भी आती हैं। नवजात शिशु बेहद नाजुक होते हैं, इसलिए उनके खानपान और देखभाल को लेकर माता-पिता का चिंतित होना पूरी तरह से स्वाभाविक है। जन्म से लेकर छह महीने तक शिशु के लिए केवल मां का दूध ही संपूर्ण आहार होता है। मां के दूध में सभी जरूरी पोषक तत्व और एंटीबॉडीज मौजूद होते हैं, जो बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं और उसे बीमारियों से बचाते हैं। लेकिन एक सवाल जो हर नए पेरेंट्स के मन में रहता है वो है कि बच्चे को पानी कब से देना चाहिए। ऐसे में मशहूर पीडियाट्रिशियन डॉ रवि मलिक ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर बताया है कि किस उम्र में शिशु को पानी देना चाहिए।  

6 महीने तक शिशु को न दें पानी

डॉ. रवि मलिक साफ तौर पर बताते हैं कि जन्म से लेकर 6 महीने तक के शिशु को पानी की एक बूंद की भी आवश्यकता नहीं होती है। 6 महीने तक के बच्चे को सिर्फ और सिर्फ मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। इस दौरान बच्चे को दूध के अलावा पानी या कोई अन्य तरल पदार्थ बिल्कुल नहीं देना चाहिए। यदि किसी कारणवश बच्चा फॉर्मूला मिल्क भी पी रहा है, तो उसे बनाते समय उसमें पानी का सही अनुपात पहले से मिलाया जाता है, इसलिए ऊपर से अलग से पानी देने की कोई जरूरत नहीं होती।

6 महीने से पहले पानी क्यों नहीं पिलाना चाहिए?
दूध में ही मौजूद है पर्याप्त पानी: मां के दूध में लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा पानी ही होता है। यह नेचुरली बच्चे की प्यास बुझाने और उसे पूरी तरह हाइड्रेटेड रखने के लिए काफी है।

इंफेक्शन का खतरा: नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर होती है। बाहरी पानी में मौजूद सूक्ष्म बैक्टीरिया बच्चे में डायरिया, पीलिया या पेट के गंभीर इंफेक्शन का कारण बन सकते हैं।

वाटर इंटॉक्सिकेशन: यह एक बेहद खतरनाक स्थिति है। 6 महीने से छोटे बच्चों की किडनी पूरी तरह विकसित नहीं होती। ज्यादा पानी पीने से शिशु के शरीर में सोडियम का स्तर तेजी से गिर सकता है, जो दौरे पड़ने का कारण बन सकता है।

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