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1 जुलाई से खुलने वाले हैं स्कूल, माता पिता बच्चों को बीमार होने से ऐसे बचा सकते हैं, बरतें सावधानी

 Written By: Bharti Singh @bhartinisheeth
 Published : Jun 29, 2026 08:49 am IST,  Updated : Jun 29, 2026 01:04 pm IST

​1 जुलाई से बच्चों के स्कूल खुल रहे हैं। ऐसे में बारिश का मौसम बच्चों को बीमार बना सकता है। मानसून के दौरान स्कूल खुलने पर अक्सर बच्चों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टर ने बताया बच्चों को बीमार होने से बचाने के लिए माता पिता क्या सावधानी बरतें।

बच्चों को बीमार होने से कैसे बचाएं- India TV Hindi
बच्चों को बीमार होने से कैसे बचाएं Image Source : INDIA TV

गर्मी की छुट्टियां खत्म होने वाली हैं और 1 जुलाई से फिर से स्कूल खुलने वाले हैं। बच्चे स्कूल जाने के लिए बहुत उत्साहित हैं। लेकिन ये बारिश का मौसम बच्चों की सेहत पर भी भारी पड़ सकता है। इस मौसम में सबसे ज्यादा इंफेक्शन और बीमारियां फैलती हैं। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। जिससे वो जल्दी बीमार पड़ते हैं। इस समय बच्चों में खांसी, जुकाम, बुखार और पेट के संक्रमण फैलने लगता है। ऐसे में माता पिता को बहुत ख्याल रखने की जरूरत है। 

नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में बाल चिकित्सा सलाहकार डॉक्टर नेहल शाह के अनुसार, इसे आमतौर पर स्कूल दोबारा खुलने का प्रभाव कहा जाता है, जहां उमस भरे मौसम और भीड़भाड़ वाली क्लासेस के कारण बच्चों में संक्रमण तेजी से फैलता है।

स्कूल जाने वाले बच्चे क्यों ज्यादा बीमार पड़ते हैं?

डॉक्टर शाह की मानें तो बच्चे अपनी गर्मियों की छुट्टियां ज्यादातर अपने घरों की सुरक्षा में बिताते हैं। स्कूल खुलने के बाद वो अचानक बच्चों के क्लोज कॉन्टेक्ट में आते हैं। वो क्लासेस, बेंच, किताबें, स्टेशनरी और खिलौने शेयर करते हैं। जिससे सांस के जरिए वायरस और बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं।

मानसून का मौसम स्थिति को और भी चुनौतीपूर्ण बना देता है। हाई ह्यूमिडिटी की वजह से कुछ वायरस सतहों पर अधिक समय तक जीवित रह पाते हैं, जबकि हवा में मौजूद नमी खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों को अधिक देर तक हवा में रखती है। वहीं स्कूलों के आसपास बारिश का पानी जमा होने से मच्छरों के प्रजनन का खतरा बढ़ता है, जिससे डेंगू, मलेरिया का खतरा बढ़ जाता है।

मानसून में होने वाली आम बीमारियां

सर्दी, खांसी, वायरल बुखार और ब्रोंकाइटिस जैसी श्वसन संक्रमण आसानी से फैलते हैं। इसके अलावा इस मौसम में पेट से जुड़े संक्रमण भी होने लगते हैं। दूषित खाना या पीने का पानी दस्त, रोटावायरस संक्रमण और जीवाणु जनित पेट की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।

बारिश में क्यों बीमार पड़ते हैं बच्चें

डॉक्टर शाह का कहना है कि इस मौसम में कई चीजें इंफेक्शन बढ़ाने का कारण बनती हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से, स्कूल खुलने पर अचानक कई तरह के वायरस और बैक्टीरिया के संपर्क में आने पर, इंफेक्शन और बीमार होने का खतरा बढ़ जाता है। साफ सफाई न रखने, नाखून न काटने और हाथ सही तरीके से न धोने से बीमार होने का खतरा रहता है। इसके अलावा नींद पूरी न होने से भी मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

बच्चों को बीमार होने से बचाने के लिए क्या सावधानी बरतें

  • बच्चों को साफ-सफाई का ध्यान रखने के बारे में सिखाएं।शौचालय का उपयोग करने के बाद, खाना खाने से पहले और स्कूल से घर आने के बाद हाथों को साबुन से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोएं। 

  • बच्चों को सिखाएं खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को टिश्यू या अपनी कोहनी से ढककर रखें और श्वसन संबंधी शिष्टाचार भी सीखना चाहिए।

  • अगर बच्चा बीमार है तो उसे घर पर ही रखें। बीमार बच्चे को स्कूल भेजने से दूसरे बच्चों और शिक्षकों को भी इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।

  • बच्चों को ज्यादा सब्जियां, मौसमी फल और दूसरे पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ खिलाएं। साफ पानी और गुनगुनी चीजें ही बच्चों को खिलाएं।

  • स्कूलों को क्लास, डेस्क, दरवाजों के हैंडल, शौचालयों और पीने के पानी की सुविधाओं की नियमित सफाई से बीमारियों के फैलने के खतरे को कम किया जा सकता है।

  • पर्याप्त नींद भी बहुत जरूरी है। क्योंकि इससे शरीर को ठीक होने और अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद मिलती है।

  • विद्यालयों में जागरूकता सत्र आयोजित करने से बच्चों को मानसून के दौरान अच्छी स्वच्छता बनाए रखने के महत्व को समझने में भी मदद मिल सकती है।

  • अगर बच्चा बीमार हो, बुखार, सांस लेने में परेशानी या पेट से जुड़ी समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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