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रोज 20 मिनट वॉक करने से दिमाग पर कैसा असर पड़ता है? हार्ट सर्जन ने गिनाए शॉर्ट और लॉन्ग टर्म फायदे

 Written By: Poonam Yadav
 Published : Aug 13, 2026 11:09 pm IST,  Updated : Aug 13, 2026 11:09 pm IST

डॉक्टर के मुताबिक, रोजाना सिर्फ 20 मिनट की वॉक करने से कोर्टिसोल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, जिससे मूड बेहतर होता है और तनाव कम होता है

रोज 20 मिनट वॉक करने के फायदे,- India TV Hindi
रोज 20 मिनट वॉक करने के फायदे Image Source : UNSPLASH

वॉक और एक्सरसाइज को फिट बॉडी और हेल्दी शरीर से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं इसका सीधा असर आपकी दिमाग पर भी पड़ता है। बोर्ड-सर्टिफाइड हार्ट सर्जन डॉक्टर जेरेमी लंदन ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर बताया कि एक्सरसाइज से दिमाग को कई फायदे मिल सकते हैं। उन्होंने इसे डिप्रेशन से बचाव के लिए सबसे कम आंकी गई आदतों में से एक बताया।

मानसिक सेहत होती है बेहतर

डॉक्टर लंदन कहते हैं अगर आप अपनी मानसिक सेहत को लेकर परेशान हैं, तो शारीरिक गतिविधि उसे कंट्रोल करने में आपकी मदद कर सकती है। जिन दिनों आपका मन बिल्कुल भी हिलने-डुलने का नहीं करता, अक्सर उन्हीं दिनों आपको इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है। उन्होंने आगे कहा, "याद रखें, कार्डियो ट्रेनिंग सिर्फ़ आपके दिल के लिए नहीं है। रेजिस्टेंस ट्रेनिंग सिर्फ़ आपकी मांसपेशियों के लिए नहीं है। जो चीज़ आपके दिल के लिए अच्छी है, वह आपके दिमाग के लिए भी अच्छी है। और एक्सरसाइज़ हमारे दिमाग की सेहत को सुरक्षित रखने और बनाए रखने के सबसे शक्तिशाली तरीकों में से एक है।

कम समय तक बीस मिनट वॉक के फायदे

अगर आप कुछ दिनों तक बीस मिनट वॉक करते हैं तो इससे कोर्टिसोल लेवल कम होता है। यह आपको तनाव पूर्ण स्थिति से निपटने वाले मोड से बाहर निकालता है। लगातार एक ही बात सोचते रहने को रोकता है और नकारात्मक विचारों के चक्र से बाहर निकलने में मदद करता है। सुबह और दोपहर की धूप शरीर की बायोलॉजिकल घड़ी (सर्कैडियन रिदम) और मूड को ठीक रखने में मदद करती है

लंबे समय तक बीस मिनट वॉक के फायदे

डॉक्टर लंदन के अनुसार, रोज़ाना 20 मिनट तक वॉक करने से  डिप्रेशन होने का ख़तरा 25 प्रतिशत कम हो जाता है। यहां तक कि 10 मिनट टहलने से भी यह ख़तरा 18 प्रतिशत कम हो जाता है। एंग्जायटी डिसऑर्डर होने का ख़तरा लगभग 29 प्रतिशत कम हो जाता है। साथ ही लंबे समय में अल्जाइमर और पार्किंसंस का ख़तरा कम होता है। उन्होंने कहा, 'जब आप एक्सरसाइज़ करते हैं, तो आपका दिमाग ब्रेन-डिराइव्ड न्यूरोट्रॉफ़िक फ़ैक्टर नाम की चीज़ बनाता है। इसे खाद की तरह समझें। यह दिमाग की कोशिकाओं के बीच कनेक्शन को बेहतर बनाता है और उन्हें बढ़ने में मदद करता है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है)

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