अच्छी नींद लेना सेहत के लिए जरूरी है। अगर आप लंबे समय तक कम सोते हैं तो इससे दिमाग ही नहीं शरीर पर भी असर पड़ता है। कम नींद के कारण सिर्फ सुबह थकान या कमजोरी ही महसूस नहीं होती बल्कि नींद पूरी न होने से दिमाग के काम करने का तरीका भी प्रभावित हो सकता है। इससे शरीर के हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है और दिनभर की आदतों में भी बदलाव आ सकता है। कम नींद लेने पर आपको बार-बार कुछ खाने की क्रेविंग हो सकती है, ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है, तनाव बढ़ सकता है और शरीर में एनर्जी कम महसूस हो सकती है। धीरे-धीरे शरीर उतनी नींद का आदी होने लगता है, जितनी आप उसे दे रहे हैं। भले ही ये आपके शरीर के लिए पर्याप्त न हो। इसलिए अगली बार जब आप देर रात तक जागें और इसे बस आज की ही बात है कहकर टाल दें, तो याद रखें कि नींद की कमी का असर आपके दिमाग और शरीर पर पड़ सकता है। आइये डॉक्टर आलोक चोपड़ा से जानते हैं कम सोने से क्या होता है?
6 से 8 घंटे से कम सोने से दिमाग पर क्या असर होता है?
दिमाग पर असर- अगर आप लगातार लंबे समय तक 6 घंटे से कम नींद लेते हैं तो इससे दिमाग पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे लोगों को ध्यान लगाने में मुश्किल आ सकती है। ध्यान लगाना और सतर्क रहना मुश्किल हो जाता है। इससे याददाश्त पर असर पड़ता है। जानकारी को प्रोसेस करने और उसे पक्का करने के लिए दिमाग को नींद की ज़रूरत होती है। लेकिन कम नींद लेने पर रिएक्शन का समय धीमा हो जाता है, जिससे रोजमर्रा के काम और फैसले लेने की क्षमता पर असर पड़ता है। मूड में बदलाव चिड़चिड़ापन और इमोशनल सेंसिटिविटी बढ़ सकती है, दिमाग के ठीक होने की प्रक्रिया पर असर पड़ता है। नींद शरीर और दिमाग के ठीक होने और उनकी देखभाल का एक एक्टिव टाइम होता है।
हार्मोन पर असर- कम सोने से आपके हार्मोन पर असर पड़ सकता है। इससे कोर्टिसोल, आपके तनाव का स्तर बढ़ा रह सकता है। जिससे भूख ज्यादा लग सकती है। नींद की कमी से भूख बढ़ सकती है और खाना खाने के बाद भी आपको पेट भरने का एहसास कम हो सकता है। ऐसे लोगों का शरीर ब्लड शुगर को ठीक से मैनेज नहीं कर पाएगा। शरीर की रिकवरी में देरी होने से मांसपेशियों और अन्य टिश्यू को ठीक होने के लिए कम समय मिलता है।
बदलने लगती हैं आदतें- लंबे समय तक कम सोने से आपकी आदतें बदलने लगती हैं। कम सोने वालों में ज्यादा क्रेविंग होती है। खासतौर से तुरंत एनर्जी देने वाले, ज्यादा कैलोरी वाले खाने की इच्छा बढ़ जाती है। ऐसे लोगों में ज़्यादा कैफ़ीन लेने की आदत बन जाती है, जिसका उपयोग लोग खुद को तनाव या थकान से निपटने के लिए करते हैं। जब शरीर में एनर्जी कम हो, तो कसरत करना मुश्किल लगता है। ऐसे लोगों को छोटे-छोटे काम भी मुश्किल लग सकते हैं। नतीजा ये है कि खराब नींद से थकान, क्रेविंग, सुस्ती और फिर और भी खराब नींद का एक चक्र बन सकता है।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)