उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं और 40 की उम्र के बाद डाइट पर खास ध्यान देना जरूरी हो जाता है। इस उम्र में हड्डियों, पाचन, हार्मोनल बदलाव और वजन से जुड़ी समस्याओं का ध्यान रखना जरूरी होता है। ऐसे में पोषक तत्वों से भरपूर सब्जियों को डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। सुरन ऐसी ही एक सब्जी है, जिसमें फाइबर, पोटैशियम और कई अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। न्यूट्रिशनिस्ट और वेट लॉस कोच लीमा महाजन ने अपने यू ट्यूब पर पर वीडियो शेयर कर बताया है, इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बनाकर महिलाएं इसके कई संभावित फायदे पा सकती हैं।
40 की उम्र के बाद सुरन खाने के फायदे
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पाचन के लिए फायदेमंद: सुरन में अच्छी मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद कर सकता है। इसे डाइट में शामिल करने से कब्ज जैसी समस्या से बचने में भी मदद मिल सकती है।
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वजन मैनेजमेंट में मददगार: फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करते हैं। ऐसे में संतुलित मात्रा में सुरन खाने से बार-बार लगने वाली भूख को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
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हार्मोन को बैलेंस करने में मदद: सुरन में मौजूद पोषक तत्व और फाइबर शरीर के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। 40 की उम्र के बाद होने वाले हार्मोनल बदलावों के दौरान संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में सुरन को शामिल किया जा सकता है।
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हड्डियों के लिए जरूरी पोषक तत्व: 40 के बाद महिलाओं को हड्डियों की सेहत पर विशेष ध्यान देना चाहिए। सुरन में पोटैशियम और कुछ अन्य माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं, जो संतुलित डाइट का हिस्सा बन सकते हैं।
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शरीर को जरूरी पोषण देता है: सुरन में कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और कई विटामिन-मिनरल्स पाए जाते हैं। इसलिए इसे अन्य सब्जियों और प्रोटीन स्रोतों के साथ संतुलित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है।
कैसे खाएं?
सुरन को उबालकर, सब्जी बनाकर या कम तेल में पकाकर डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसे डीप फ्राई करने के बजाय हल्के तेल में पकाना बेहतर विकल्प रहेगा।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)