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6- अमेरिकी अंतरिक्ष यानों के रनवे की तरह श्रीहरिकोटा में एक रनवे बनाया जाएगा। जब यह यान अपने अंतिम चरण में पहुंच जाएगा, तब यह श्रीहरिकोटा में जमीन पर वापस आएगा।
7- परीक्षण के पहले चरण में यह समुद्र की सतह से टकराने के बाद टूट जाएगा। अभी इसे तैरने लायक नहीं बनाया गया है।
8- इस यान के सफल होने पर इसे ‘कलामयान’ नाम दिया जाएगा।
9- इसरो ने पहली बार पंखों वाले उड़ान यान का प्रक्षेपण किया है। सरकार ने आरएलवी-टीडी परियोजना में 95 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
10- अगर दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले रॉकेट वास्तविकता का रूप ले लें तो अंतरिक्ष तक पहुंचने का खर्च दस गुना कम हो सकता है।