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दिल्‍ली: CBI की ओर से राजेन्द्र कुमार की गिरफ्तारी के बाद घबराए अधिकारी

 Written By: Kundan Kumar
 Published : Jul 13, 2016 10:22 pm IST,  Updated : Jul 13, 2016 10:22 pm IST

मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार की सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी के बाद सरकार के अधिकारियों में भय ब्याप्त हो गया है

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नई दिल्ली: मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार की सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी के बाद सरकार के अधिकारियों में भय ब्याप्त हो गया है तथा वे अपने मुख्य प्रभार के अलावा किसी भी अतिरिक्त प्रभार से मुक्त रहना चाहते हैं ताकि किसी कानूनी पेंच में फंसने से उनका बचाव हो सके। गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव व आबकारी आयुक्त ने अतिरिक्त प्रभाव छोड़ने की मंशा जताई है। कई अन्य अधिकारी भी ऐसी इच्छा रखते हैं जिनमें वैट कमिश्नर एसएस यादव शामिल हैं लेकिन श्री यादव ने इसकी पुष्टि नहीं की है। राजेन्द्र कुमार का पद लेने के लिए अभी कोई वरिष्ठ अधिकारी तैयार नहीं है।

गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव ओ पी मिश्रा ने मुख्य सचिव को विस्तृत पत्र भेज दिया है कि उनसे कानून विभाग के अतिरिक्त सचिव का भार वापस ले लिया जाए। अपने पत्र उन्होने स्पष्ट लिखा है कि कानून विभाग के अतिरिक्त सचिव के पद पर न्यायिक सेवा के अधिकारी को रखा जाता है जो कानून के स्नातक भी होते हैं। कानून विभाग के अतिरिक्त सचिव के पास जो फाइल आती है उसमें कई जटिल कानून की विवेचना करनी पड़ती है। इसमें कानूनी दस्तावेज, कैबिनेट नोट, कांट्रेक्ट एग्रीमेंट, औद्योगिक कानून, कामर्शियल कानून, आपराधिक कानून, बिजली विभाग के कानून व संविधान से जुड़े दिल्ली सरकार के मसले शामिल होते हैं।

साथ ही उन्हें उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बुलाई उच्च स्तरीय बैठक में जाना पड़ता है। दिल्ली न्यायिक सेवा के अधिकारी ही इस पद को संभालते हैं क्योंकि उन्हें कानून का वृहद ज्ञान होता है।  ओ पी मिश्रा ने अपने पत्र में लिखा है कि दानिक्स सेवा में 25 वर्षो के अनुभव के आधार पर वे अतिरिक्त सचिव (कानून) का पद को संभाल रहे हैं। लेकिन यह पद किसी न्यायिक सेवा के अधिकारी को दिया जाना चाहिए ताकि सरकार के हितों के विरूद्ध कोई राय देने से बचा जा सकेगा। सरकार के शीर्ष अधिकारी ओ पी मिश्रा के आग्रह पर विचार कर रहे हैं।

लेकिन यह मसला ब्यापक रूप ले रहा है। आबकारी आयुक्त संजय कुमार के पास परिवहन विभाग का अतिरिक्त प्रभार है जिसमें प्रीमियम बस सेवा को लेकर उन्हें एलजी का आक्रोश झेलना पड़ा। वे परिवहन विभाग का अतिरिक्त प्रभार छोड़ने की इच्छा से शीर्ष अधिकारियों को अवगत करा दिया है। इसी क्रम में वैट कमिश्नर के पास भी अतिरिक्त प्रभार है जिससे वे मुक्त होना चाहते हैं।

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