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गरुड़ कमांडो ज्योति प्रकाश मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित, भावुक हुए राष्ट्रपति कोविंद

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Jan 26, 2018 11:09 am IST,  Updated : Jan 26, 2018 11:19 am IST

कारपोरल निराला उस गरुड़ विशेष बल इकाई का हिस्सा थे जिसकी एक टुकड़ी जम्मू-कश्मीर में अभियान ‘रक्षक’ के तहत राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन के साथ संबद्ध थी। बांदीपुरा जिले के चंदेरगर गांव में खुफिया सूचना के आधार पर 18 नवंबर 2017 को अभियान चलाया गया था।

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गरुड़ कमांडो ज्योति प्रकाश मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित, भावुक हुए राष्ट्रपति कोविंद

नयी दिल्ली : जम्मू कश्मीर में एक अभियान के दौरान दो आतंकवादियों को मार गिराने वाले बिहार के वीर सपूत भारतीय वायु सेना के गरुड़ कमांडो ज्योति प्रकाश निराला को मरणोपरांत शांतिकाल में सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। 69वें गणतंत्र दिवस पर निराला को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अशोक चक्र से सम्मानित किया। राजपथ पर निराला की पत्नी और मां को राष्ट्रपति ने अशोक चक्र दिया। निराला को अशोक चक्र से सम्मानित करते वक्त रामनाथ कोविंद की आंखे नम हो गई। भारतीय इतिहास में यह पहला मौका है जब भारतीय वायुसेना के किसी गरुड़ कमांडो को अशोक चक्र से नवाजा गया है। 18 नवंबर को जम्मू-कश्मीर के बंदीपोरा में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में निराला शहीद हुए थे।

कारपोरल निराला उस गरुड़ विशेष बल इकाई का हिस्सा थे जिसकी एक टुकड़ी जम्मू-कश्मीर में अभियान ‘रक्षक’ के तहत राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन के साथ संबद्ध थी। बांदीपुरा जिले के चंदेरगर गांव में खुफिया सूचना के आधार पर 18 नवंबर 2017 को अभियान चलाया गया था। उस अभियान में छह आतंकियों को मार गिराया गया लेकिन निराला भी इसमें शहीद हो गए।

यह पहला अवसर है जब भारतीय वायुसेना के किसी गरुड़ कमांडो को अशोक चक्र से नवाजा गया है। गरुड़ कमांडो निराला तीन महीने पहले ही आतंकरोधी अभियान के तहत स्पेशल ड्यूटी पर कश्मीर के हाजिन में सेना के साथ तैनात थे। श्रीनगर में इसी ऑपरेशन के दौरान सेना की तरफ से की गई कर्रवाई में आतंकी मसूद अजहर के भतीजे तल्हा रशीद को मारा गया था। कमांडो निराला अपने माता-पिता के एकलौते बेटे थे। परिवार में माता-पिता के अलावा उनकी पत्नी सुषमा और 4 साल की बेटी जिज्ञासा हैं। उनकी पत्नी सुषमा ने आज तक को बताया कि वह हमेशा वीरता की बातें करते थे। उनकी 8 साल की सर्विस हुई थी। जुलाई 2017 में उन्हें कश्मीर जाने का मौका मिला।

उनकी पत्नी का कहना है कि वह उनसे अक्सर कहते थे कि वह रहें या ना रहें तुम्हें आत्मनिर्भर बनना होगा। उनके भरोसे नहीं रहना है। वह देश की सेवा के लिए हैं, देश उनका पहला कर्तव्य है। उनकी पत्नी ने बताया कि उनकी आखिरी बार उनसे 17 नवंबर 2017 को बात हुई थी। बेटी जिज्ञासा भी अपने पिता के पदचिन्हों पर आगे चलेगी जैसे उनके पति ने देश का नाम रोशन किया वैसे ही उनकी बेटी भी देश का नाम रोशन करेगी। शहीद निराला के पिता तेजनारायण ने बताया कि उनका एकलौता बेटा था लेकिन आज उन्हें गर्व है कि वह देश पर शहीद हो गया। उसने अपना जीवन देश पर कुर्बान किया।

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