गुवाहाटी/कोलकाता: असम पुलिस ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से संबंधित टिप्पणी को लेकर आज पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की। उनके खिलाफ ऐसी कई शिकायतें मिली थी कि उन्होंने पूर्वोत्तर के इस राज्य में एनआरसी को अद्यतन किये जाने को लेकर ‘भड़काऊ’ बयान दिया। ममता ने कल पश्चिम बंगाल के अहमदपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए भाजपा की अगुवाई वाली राजग सरकार पर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के पहले मसौदे में बंगालियों के नाम हटाकर उन्हें असम से बाहर करने की ‘साजिश’ रचने का आरोप लगाया। पहले मसौदे का प्रकाशन 31 दिसंबर, 2017 को किया गया। उन्होंने कहा था, ‘‘ मैं केंद्र की भाजपा सरकार को आग से नहीं खेलने की चेतावनी देती हूं...यह करीब 1.80 करोड़ लोगों को राज्य से खदेड़ने की केंद्र सरकार की साजिश है।’’
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गुवाहाटी पुलिस के उपायुक्त (मध्य) रंजन भूइयां ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘लतासिल थाने को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के एक कथित भाषण के संदर्भ में शिकायत मिली है। हमने शिकायत दर्ज कर ली है ओर नियमों के अनुरूप जांच करेंगे।’’ उन्होंने बताया कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय के अधिवक्ता तैलेंद्र नाथ दास ने शिकायत की और पुलिस ने आईपीसी की धारा 153 (ए) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। यह धारा धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, निवास और भाषा के नाम पर लोगों के बीच शत्रुता पैदा करने और सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश से संबंधित है। दास ने ममता पर उच्चतम न्यायालय की अवमानना का भी आरोप लगाया है क्योंकि एनआरसी का काम उच्चतम न्यायालय की प्रत्यक्ष निगरानी में हो रहा है। पुलिस ने बताया कि एक अन्य व्यक्ति ने इसी तरह की शिकायत की है और प्राथमिकी के साथ इसे जोड़ दिया जाएगा।
ममता बनर्जी के बयान की निंदा करते हुए कई समूहों ने आज असम में प्रदर्शन किये। तिनसुकिया और विश्वनाथ सहित कई स्थानों पर ममता के पुतले भी जलाये गए। इस बीच पश्चिम बंगाल भाजपा ने भी ममता के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस निहित राजनीतिक स्वार्थ के लिए ‘एक बिना महत्व की बात को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।’ पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व पर पश्चिम बंगाल को ‘जिहादियों की पनाहगाह’ बनाने का भी आरोप लगाया।
असम के मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने एनआरसी अपडेट के खिलाफ ममता के भाषण के खिलाफ ममता का भाषण ‘‘राजनीति से प्रेरित’’ और ‘‘उनके वोटबैंक का तुष्टिकरण करने वाला’’ बताया। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम ममता बनर्जी के बयान की निंदा करते हैं। यह आपत्तिजनक और असम की जनता का अपमान है। यह भारत के संविधान तथा उच्चतम न्यायालय की भावना के खिलाफ है।’’