नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सामाजिक एवं शैक्षिक आधार पर समाज के पिछड़े वर्ग के आयोग के गठन के लिए एक विधेयक को पूर्वव्यापी मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार ने पांच अप्रैल को पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम-1993 को खत्म करने के लिए विभिन्न विधेयकों को सदन में पेश किया था। लोकसभा में यह विधेयक 10 अप्रैल को पारित हो गया, लेकिन राज्यसभा में विपक्षी दलों द्वारा इसकी पुनर्समीक्षा के लिए 11 अप्रैल को इस विधेयक को सदन की एक प्रवर समिति को भेज दिया गया।
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बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस आयोग के गठन से देश के सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग के कल्याण में मददगार होगा। गौरतलब है कि ऊपरी सदन में पारित होने के बाद ही आयोग का गठन होगा और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम-1993 रद्द होगा, लेकिन मंत्रिमंडल द्वारा पूर्वव्यापी मंजूरी मिलने से अब यह विधेयक जब भी पारित हो और अधिनियम का रूप ले, इसके तहत नया कानून 19 अप्रैल से ही लागू माना जाएगा।
आधिकारिक बयान में कहा गया है, "इस विधेयक में मौजूदा अधिनियम को खत्म करने वाला प्रस्ताव नया आयोग गठित करने के लिए जरूरी था। इसके लिए संविधान में अनुच्छेद 338बी को शामिल किया जाएगा। मंत्रिमंडल का यह फैसला सुनिश्चित करने वाला है कि संविधान के अनुच्छेद 338बी के तहत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का कामकाज पूर्ववत जारी रहे।" मंत्रिमंडल का इस फैसले से इस आयोग को सांविधानिक दर्जा भी मिलेगा।
मौजूदा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम-1993 के तहत किया गया था, जिसका काम में किसी वर्ग के नागरिक को पिछड़ा वर्ग अनुसूची में शामिल करने या सूची से हटाने के अनुरोध की जांच करना था।
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