नई दिल्ली: भाजपा ने कश्मीर मुद्दे पर पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम की ओर से दिए गए प्रस्ताव को लेकर उन पर निशाना साधते हुए कहा कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता होता है। पार्टी ने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार बगैर कोई समझौता किए देश की एकता एवं अखंडता सुनिश्चित करेगी। भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि कांग्रेस के सत्ता गंवाने के बाद उसके वरिष्ठ नेता को बुद्धि आई है और इतने सालों तक नेहरू जी से लेकर सोनिया जी की सरकारों ने क्या किया।
नायडू ने चिदंबरम के प्रस्ताव को आपत्तिजनक करार देते हुए एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, यह और कुछ नहीं बल्कि सस्ती राजनीति है। इससे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता होगा। उन्होंने कहा कि एक पूर्व गृह मंत्री से ऐसी टिप्पणी की उम्मीद नहीं थी। कश्मीर के हालात का क्रांतिकारी समाधान सुझाते हुए चिदंबरम ने बुधवार को उस बड़े समझौते (ग्रैंड बारगेन) की बहाली की वकालत की थी जिसके तहत कश्मीर का भारत में विलय हुआ था और उसे व्यापक स्वायत्ता दी गई थी। चिदंबरम ने कहा था कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो देश को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने विवादित सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) में ढील देने का भी सुझाव दिया था।
नायडू ने कहा, सत्ता गंवाने के बाद वह उपदेश दे रहे हैं। हमारी पार्टी और सरकार देश की एकता एवं सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इसकी एकता एवं अखंडता सर्वोपरि है, न कि एक आतंकवादी की जिंदगी। चाहे कुछ भी हो जाए, हम बगैर किसी समझौते के इसकी सुरक्षा करेंगे। पीडीपी के साथ भाजपा के गठबंधन को लेकर कश्मीर में खौफ का माहौल होने की चिदंबरम की टिप्पणी पर नायडू ने कहा कि कांग्रेस इतने सालों तक नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के साथ गठबंधन में रही और पीडीपी-भाजपा के सत्ता में आने से आए ऐतिहासिक मोड़ को वह पचा नहीं पा रही है।
नायडू ने कहा, वह टूटे हुए वादों की बातें करते हैं। उन्हें बताना चाहिए कि कौन से वादे। अब उन्हें वे याद आते हैं। कांग्रेस ने इतने सालों तक देश पर शासन किया। उसने नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के साथ सरकारें बनाई। वह गृह मंत्री थे। उन्हें बताना चाहिए कि कौन से वादे पूरे नहीं हुए। कुछ नेताओं और मीडिया के एक तबके पर निशाना साधते हुए नायडू ने कहा, नेहरू जी से लेकर सोनिया जी तक....इतनी सरकारें आईं तो उन्होंने क्या किया? यह और कुछ नहीं बल्कि अल्पकालिक फायदे के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति करना है। नायडू ने कांग्रेस की सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि कश्मीर की समस्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पैदा नहीं की है और लोग जानते हैं कि उस वक्त सत्ता में कौन थे और वे इससे कैसे निपटे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार कश्मीर के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की मुठभेड़ में मौत का जिक्र करते हुए नायडू ने कुछ पार्टियों और स्तंभकारों पर आरोप लगाया कि वे प्रत्यक्ष तौर पर या परोक्ष तौर पर एक ऐसे आतंकवादी से हमदर्दी जता रहे हैं जो हत्या के 15 मामलों में वांछित था। नायडू ने कहा, कोई किसी आतंकवादी से कैसे हमदर्दी रख सकता है ?.....कश्मीर के बारे में दुष्प्रचार कर रहे लोग देश के साथ नाइंसाफी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा बल गलतियां करते हैं तो व्यवस्था में ऐसा तंत्र है जिसके तहत उसका निदान होता है।
नायडू ने कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से लोकसभा में कश्मीर में रायशुमारी कराने की मांग का भी जिक्र किया और कहा कि सिंधिया ने उनसे स्पष्ट किया कि उनके कहने का मतलब प्लेबिसाइट यानी जनमत-संग्रह नहीं था। सिंधिया ने उर्दू शब्द रायशुमारी का इस्तेमाल किया था।