देहरादून: उत्तराखंड में कम बर्फबारी का असर अब ग्लेशियर पर भी दिखने लगा है। गोमुख ग्लेशियर का एक टुकड़ा टूटकर भागीरथी नदी में गिर गया। ग्लेशियर टूटकर गिरने की वजह से वैज्ञानिक से लेकर पर्यावरणविदों तक के कान खड़े हो गए हैं। जीबी पंत विकास संस्थान अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों ने ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने की पुष्टि की है, हालांकि वैज्ञानिकों ने इसे मौसम की सामान्य घटना बताया है।
समुद्र तल से करीब 4,000 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद गोमुख ग्लेशियर का अस्तित्व खतरे में है। बताया जा रहा है 30 किलोमीटर लम्बे गोमुख ग्लेशियर का 2 मीटर का एक हिस्सा टूट कर भागीरथी नदी की तेज बहाव में बह गया। टूटे हुए ग्लेशियर का टुकड़ा 18 किलोमीटर दूर गंगोत्री के पास दिखा।
कम बर्फबारी का असर
जानकारों के मुताबिक इस साल कम बर्फबारी की वजह से ग्लेशियर टूट रहा है। ग्लेशियर वैज्ञानिकों के मुताबिक मौसम में आये बदलाव की वजह से मई में ही बर्फ तेजी से पिघलनी शुरू हो गयी थी। हालांकि प्रशासन अभी गोमुख में ग्लेशियर टूटने की खबर को गलत बता रहे है।
भोजबासा में तीन वैज्ञानिकों का दल पहले से ही गोमुख ग्लेशियर के अध्ययन के लिए मौजूद है लेकिन संचार व्यवस्था बाधित होने की वजह से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसलिए वैज्ञानिकों की एक टीम को गोमुख भेजने की तैयारी की जा रही है।