अहमदाबाद: वर्ष 2002 के गुलबर्ग नरसंहार कांड में विशेष जांच दल (SIT) के वकील आर सी कोडकर ने इस मामले में निचली अदालत के फैसले पर आज असंतोष व्यक्त किया और उच्च न्यायालय जाने की घोषणा की क्योंकि उनका मानना है कि मुजरिमों को दी गई सजा बहुत कम है।
कोडकर खासकर इस बात से परेशान थे कि अदालत ने 11 मुजरिमों की उम्रकैद की सजा में मृत्यु तक लिखने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, ‘आज का फैसला उतना संतोषजनक नहीं है। हम महसूस करते हैं कि सजा नरम और अपर्याप्त है। बहस के दौरान हमने अदालत से अपील की थी कि सभी को मृत्यु होने तक की उम्रकैद की सजा सुनायी जाए। हम सुनायी गयी सजा से संतुष्ट नहीं है।’
उन्होंने कहा कि 12 मुजरिमों को बस सात साल की सजा सुनायी गयी जो बहुत ही नरम है। यह दस साल या उम्रकैद होना चाहिए। उन्होंने कहा, हम उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।
गुलबर्ग उन नौ मामलों में एक है जिनकी जांच उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त एसआईटी ने की है। इस दल के अगुवा पूर्व सीबीआई प्रमुख आर के राघवन हैं। यहां की एक विशेष अदालत ने गुलबर्ग नरसंहार कांड में आज 11 मुजरिमों को मृत्यु तक उम्रकैद की सजा सुनायी बशर्ते कि राज्य सजा कम करने के अधिकार का इस्तेमाल न करे।
अदालत ने 13 मुजरिमों में एक को हलके अपराधों में दस साल की कैद की सजा सुनायी। बारह अन्य को सात सात साल की कैद की सजा सुनायी गयी। अभियोजन पक्ष ने दलील दी थी कि सभी 24 मुजरिमों को मृत्युदंड दिया जाए।
गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार कांड ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। अहमदाबाद में 28 फरवरी, 2002 को करीब 400 लोगों की भीड़ ने इस सोसायटी पर हमला किया था और पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी समेत 69 लोगों को मार डाला था। उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।