मथुरा: उत्तर प्रदेश में सत्याग्रह के नाम पर एक शहर को झुलसा दिया गया। दो साल के बाद मथुरा के जवाहर बाग को अवैध कब्जे से छुड़ा तो लिया गया लेकिन इस कोशिश में पुलिस महकमे के दो अफसर शहीद हो गए। SP सिटी मुकुल द्विवेदी और एक SO संतोष कुमार यादव समेत 24 लोगों की मौत हो गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
ये गुरुवार शाम साढ़े चार बजे की घटना है जब पुलिस, जवाहर बाग पर कब्जा किए लोगों को हटाने आई थी। पुलिस ये मानकर चल रही थी कि उनके पास लाठी और तलवार है लेकिन ग्रेनेड, देसी बम और राइफल की भनक तक पुलिस को नहीं थी। नतीजतन हालात बिगड़ते चले गए। पुलिस ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है और 320 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। क्षेत्र में तनाव बरकरार है।
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केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अखिलेश यादव से फोन पर बात कर लोगों के मारे जाने पर दु:ख प्रकट किया और राज्य सरकार को सभी आवश्यक मदद मुहैया कराने का आश्वासन दिया।
ये गुरुवार शाम साढ़े चार बजे की घटना है जब पुलिस, जवाहर बाग पर कब्जा किए लोगों को हटाने आई थी। पुलिस ये मानकर चल रही थी कि उनके पास लाठी और तलवार है लेकिन ग्रेनेड, देसी बम और राइफल की भनक तक पुलिस को नहीं थी। नतीजतन हालात बिगड़ते चले गए।
लिहाजा सवाल ये भी उठ रहे है कि-
- क्या पुलिस वालों को हथियार के बारे में जानकारी नहीं थी ?
- डीएम ऑफिस के पास में बाग है तो हथियार कैसे पहुंचा ?
- क्या लोकल एजेंसियों के पास कोई खबर नहीं थी ?
- पुलिस पता क्यों नहीं लगा पाई अंदर कितने लोग हैं ?
- क्या पुलिस हमला के लिए पहले से तैयार नहीं थी
'सत्याग्रह' के नाम पर बम-बारूद से हमला
अब जांच होगी तो सच सामने आएगा लेकिन सबसे बड़ा सच यही है पुलिस जब तक कुछ समझ पाती अंदर से ही फायरिंग होने लग गई। रात होते होते ये ऑपरेशन तो खत्म हो गया लेकिन तब तक मथुरा की पुलिस को बहुत बड़ा नुकसान हो चुका था। दो से तीन हजार स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह के लोग इस बाग पर कुंडली मारकर बैठे थे। जिस जमीन को हाई कोर्ट से सत्याग्रह के लिए मांगा गया था, वहां ऐसा अवैध कब्जा किया गया कि उसे हटाने के लिए हाईकोर्ट को ही आदेश देना पड़ा।
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