नई दिल्ली: पाकिस्तान को गुरुवार को तब बड़ा झटका लगा जब इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस ने कुलभूषण जाधव की फ़ांसी की सज़ा पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि जासूसी मामले में कहा कि जाधव को जासूस बताना का पाकिस्तान का दावा साबित नहीं होता। कोर्ट ने पाकिस्तान की ये दलील ख़ारिज कर दी कि उसे इस मामले में सुनवाई करने का अधिकार नही हैं।
कोर्ट ने कहा कि जब तक कोई फ़ैसला नहीं हो जाता, जाधव को फ़ांसी नहीं दी जाएगी। कोर्ट में ये भारत की एक बड़ी जीत है। कोर्ट ने पाकिस्तान को हिदायत दी है कि वह फिलहाल इस मामले में कोई कार्रवाई न करे।
कोर्ट के इस फैसले के बाद अब पाकिस्तान में भारतीय अधिकारी जेल में जाधव से मुलाकात कर पाएंगे।
कोर्ट का फ़ैसला
- वियना संधि के तहत कांसुलर एक्सेस मिलना चाहिये।
- पाक का जासूस का दावा साबित नहीं होता।
- दोनों देश जाधव को भारत का नागरिक मानते हैं।
- जाधव की गिरफ़्तारी एक विवादित मामला।
- भारत ने वियना समझोते के तहत अपील की।
- कोर्ट को मामले की सुनवाई करने का हक़।
क्या था मामला
46 वर्षीय पूर्व नौसेना अधिकारी जाधव को 3 मार्च 2016 को पाकिस्तान ने गिरफ्तार किया गया था। पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने उन्हें जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों के आरोपों में मौत की सजा सुनाई। जाधव के लिए राजनयिक पहुंच की मांग कर रहे भारत ने 16 बार दरख्वास्त ठुकराए जाने के बाद ICJ का रुख किया था। भारत ने जाधव मामले को 8 मई को इंटरनेशनल कोर्ट में रखा। नीदरलैंड्स के हेग में स्थित आईसीजे में मामले की सुनवाई बीते सोमवार को हुई थी। इसमें भारत और पाकिस्तान के वकीलों ने अपना पक्ष रखा था। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान वियना समझौते का उल्लंघन कर रहा है और जाधव को सबूतों के बिना दोषी करार दिया।
पाकिस्तान ने दी थी यह दलील
पाकिस्तान ने इंटरनेशनल कोर्ट में अपनी दलील में कहा था कि भारत को कुलभूषण जाधव के मामले को ICJ में लाने का हक नहीं है, क्योंकि वियना संधि जासूसों, आतंकियों और जासूसी से जुडे़ लोगों पर लागू नहीं होती। पाक की तरफ से पेश हुए वकील खवार कुरैशी ने यह भी कहा कि भारत ने जनवरी 2017 में पाकिस्तान के उस संदेश का कोई जवाब नहीं दिया, जिसमें जाधव से संबंधित केस की जांच के लिए उसका सहयोग मांगा गया था। इसके बाद, कोर्ट ने ऐलान किया था कि इस मामले में तत्काल कदम उठाए जाने से जुड़े भारत के अनुरोध पर वह अपना फैसला गुरुवार को सुनाएगी।
हरीश साल्वे ने जोरदार तरीके से रखा था भारत का पक्ष
भारत के बेहतरीन वकीलों में से एक हरीश साल्वे ने जाधव की गिरफ्तारी, उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने तथा मामले की सुनवाई से संबंधित तमाम कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और वियना संधि का उल्लंघन करार दिया था। उन्होंने कहा कि कुलभूषण जाधव पर मनगढ़ंत आरोप लगाए गए और उन्हें अपना बचाव करने के लिए कानूनी सहायता मुहैया नहीं कराई गई। साल्वे ने अदालत से कहा कि 16 मार्च, 2016 को ईरान में जाधव को किडनैप किया गया और फिर पाकिस्तान लाकर कथित तौर पर भारतीय जासूस के तौर पर पेश किया गया। इसके बाद, सैन्य हिरासत में एक अफसर के सामने उनसे कबूलनामा लिया गया। साल्वे ने कहा कि जाधव को किसी से संपर्क नहीं करने दिया गया और एकतरफा फैसला सुना दिया गया।