चेन्नई: भारत आज आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से पहली बार स्वदेशी, दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाला स्पेस शटल RLV-TD को सफलतापूर्वक लांच किया। आरएलवी प्रौद्योगिकी प्रदर्शन (RLV-TD) का मुख्य लक्ष्य पृथ्वी की कक्षा में उपग्रह पहुंचाना और फिर वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करना है। 9 मीटर लंबे रॉकेट का वजन 11 टन है। इसे एक विशेष रॉकेट वर्धक से वायुमंडल में पहुंचाया जाएगा।
अमेरिकी अंतरिक्ष यान की तरह दिखने वाले डबल डेल्टा पंखों वाला यान को एक स्केल मॉडल के रूप में प्रयोग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है जो अपने अंतिम संस्करण से करीब छह गुना छोटा है।
यहां से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किए जाने के बाद यह बंगाल की खाड़ी में तट से करीब 500 मीटर की दूरी पर आभासी रनवे पर उतरेगा। हाइपरसोनिक उड़ान प्रयोग के तौर पर जाने जाने वाले अभियान के प्रक्षेपण से लेकर उतरने तक में करीब 10 मिनट लगने की संभावना है।
दोबारा प्रयोग हो सकेगा रॉकेट

आरएलवी-टीडी को दोबारा प्रयोग में लाए जा सकने वाले रॉकेट के विकास की दिशा में एक बहुत प्रारंभिक कदम बताया जा रहा है। इसके अंतिम संस्करण के निर्माण में दस से 15 साल लगने की संभावना है। इसरो पहली बार पंखों वाले उड़ान यान का प्रक्षेपण कर रहा है। सरकार ने आरएलवी-टीडी परियोजना में 95 करोड़ का निवेश किया है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रमुख किरण कुमार ने प्रायोगिक आरएलवी के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह मूल रूप से अंतरिक्ष में बुनियादी संरचना के निर्माण का खर्च कम करने की दिशा में भारत द्वारा की जा रही एक कोशिश है। उन्होंने कहा कि अगर दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले रॉकेट वास्तविकता का रूप ले लें तो अंतरिक्ष तक पहुंच का खर्च दस गुना कम हो सकता है।
इसरो प्रमुख ने कहा, प्रक्षेपण की लागत कम करने के लिए आरएलवी हमारे लिए एक प्रक्रिया है। हमारा इरादा कई प्रौद्योगिकीय प्रदर्शन कवायद को करना है। इसमें पहला एचईएक्स-01 है जो एक हाइपर-सोनिक प्रयोग है। उन्होंने कहा, इसलिए हम पहली बार पंखों वाले यान को डिजाइन कर रहे हैं जो अंतरिक्ष से वापस आएगा। इसे एक ठोस रॉकेट मोटर से ले जाया जाएगा। इसके अलावा, यह प्रयोग की कड़ियों में पहला है और वास्तविक आरएलवी तक पहुंचने तक अभी हमें लंबी दूरी तय करनी है, जो बेहद कम लागत मैं प्रक्षेपण करने के संदर्भ में हमें जबर्दस्त क्षमता प्रदान करेगा।
इसरो प्रमुख ने कहा कि अंतत: अमेरिकी अंतरिक्ष यानों के रनवे की तरह श्रीहरिकोटा में एक रनवे बनाया जाएगा। उन्होंने कहा, जब यह अपने अंतिम चरण में पहुंच जाएगा, तब ऐसा होगा। यह पंखयुक्त यान श्रीहरिकोटा में जमीन पर वापस आएगा।