नई दिल्ली: हरियाणा में जाट समुदाय आरक्षण से जुड़ी अपनी मांगो को पूरा करवाने के लिए आंदोलन कर रहा है। आंदोलन के चलते हालात बेकाबू होते नजर आ रहे हैं। पुलिस फायरिंग और झड़प में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है। आखिर जाट समुदाय आंदोलन क्यों कर रहा है? आरक्षण को लेकर उनकी मांग क्या है? और सबसे बड़ा सवाल आंदोलन के चलते जिन चार लोगों की मौत हुई है आखिर उसका जिम्मेदार कौन है? इंसान की जिंदगी इतनी सस्ती नहीं हो सकती कि चार मौतों पर सवाल भी ना पूछा जाए? आखिर कोई तो जिम्मेदार होगा?
इस सवाल का बेहतर जवाब आंदोलन करने वाला जाट समुदाय और आंदोलन से निपटने का प्रयास में लगा प्रशासन ही दे सकता है। वैसे हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार जाटो को आरक्षण देने के मामले में जब सहमति का संकेत दे रही है, ऐसे में जाट आंदोलन से जुड़े लोगों को भी सरकार का सहयोग करना चाहिए और आपसी बातचीत से हल निकालने का प्रयास करना चाहिए।
लेकिन बेकाबू होते जाट आंदोलन के उग्र स्वरूप को देखते ऐसा लगता है कि यह आंदोलन अब इतनी जल्दी थमने वाला नहीं। पहले गुड़गांव को बंधक बनाया गया, रोहतक में भी हालात बेकाबू हुए और अब इसकी तपिश दिल्ली और पश्चिमी यूपी तक पहुंचती हुई नजर आ रही है।
आखिर क्या है जाटों की मांग
दरअसल जाट समुदाय चाहता है कि केंद्र सरकार संसद में कानून बनाकर जाटों को केंद्रीय सेवाओं में ओबीसी में शामिल करें। इसके साथ ही यूपी में ओबीसी में शामिल जाटों के आरक्षण में कोई छेड़छाड़ ना हो। हरियाणा सरकार भी यूपी की तरह जाटों को ओबीसी में शामिल करें। इसी तरह पंजाब,जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश के जाटों को भी ओबीसी आरक्षण का लाभ दिया जाए।
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