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ओडिशा: मांझी घटना में नर्स बर्खास्त, सुरक्षा एजेंसी सेवा से हटाई गई

 Written By: India TV News Desk
 Published : Aug 27, 2016 11:38 pm IST,  Updated : Aug 27, 2016 11:38 pm IST

भुवनेश्वर: अपनी पत्नी का शव 10 किलोमीटर तक बुधवार को कंधे पर ढोने वाले एक आदिवासी व्यक्ति को शव वाहन मुहैया कराने में लापरवाही बरतने को लेकर कालाहांडी जिला मुख्यालय अस्पताल के एक पुरूष नर्स

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भुवनेश्वर: अपनी पत्नी का शव 10 किलोमीटर तक बुधवार को कंधे पर ढोने वाले एक आदिवासी व्यक्ति को शव वाहन मुहैया कराने में लापरवाही बरतने को लेकर कालाहांडी जिला मुख्यालय अस्पताल के एक पुरूष नर्स को आज बर्खास्त कर दिया गया और एक सुरक्षा एजेंसी की सेवा समाप्त कर दी गई। कालाहांडी जिला कलेक्टर ब्रुंधा डी ने बताया, मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी (सीडीएमओ) ने आज एक पुरूष नर्स और सुरक्षा एजेंसी को सेवा से हटा दिया जो बुधवार को ड्यूटी पर थे। घटना की प्राथमिक जांच में उन्हें दोषी पाया गया।

सीडीएमओ बीके ब्रह्मा ने बताया कि मृतकों के शवों को उनके घर पहुंचाने के लिए अस्पताल के पास वाहन थे। ब्रह्मा ने बताया, ‘हमारे शव वाहन महीने में करीब 25 दिन काम पर रहते हैं। दाना मांझी के मामले को पुरूष नर्स राजेंद्र राणा ने अधिकारियों को नहीं बताया था।’

अधिकारियों के मुताबिक राणा मंगलवार रात ड्यूटी पर थे जब दाना मांझी की पत्नी अमांग देई (42) की टीबी से मौत हो गई। मांझी ने अपनी पत्नी की मौत के बारे में उसे बताया और शव ले जाने के लिए वाहन मांगा लेकिन राणा ने कथित तौर पर उससे खुद ही शव ले जाने को कहा था। उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा एजेंसी स्टाफ की ड्यूटी थी कि वह अस्पताल परिसर से शव ले जाने की इजाजत देने से पहले मृत्यु प्रमाणपत्र को सत्यापित करता। हालांकि, मांझी मृत्यु प्रमाणपत्र के बगैर अस्पताल से शव लेकर चला गया था।

इस बीच, कालाहांडी जिले में मेलघारा गांव में पत्रकारों की भारी भीड़ जुटी और कांग्रेस की एक तथ्यान्वेषी टीम मांझी और उनकी 12 साल की बेटी से मिलने पहुंची। मांझी ने कांग्रेस टीम को बताया, रात में मेरी पत्नी की मौत हो गई, जिसके बाद मैंने वार्ड में मौजूद अस्पताल कर्मचारी को बुलाया। उसने मुझसे शव ले जाने को कहा। मैं नहीं जानता था कि अस्पताल मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करता है और शव ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था करेगा या नहीं। शव को एक कपड़े में लपेटने में आधा घंटा लगा और गांव के लिए रवाना होने से पहले मैंने अपनी बेटी को ढाढस बंधाया।

कांग्रेस नेता भक्त चरण दास ने कहा, यह अमानवीय है। यह नवीन पटनायक सरकार के आदिवासी विरोधी रूख को जाहिर करता है। उसे अवश्य ही घटना की उच्च स्तरीय जांच और मांझी के परिवार के लिए 10 लाख रूपये की मांग करनी चाहिए।

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