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दो साल में दिखेंगे नमामि गंगे के परिणाम: उमा भारती

 Written By: India TV News Desk
 Published : Aug 19, 2016 11:07 pm IST,  Updated : Aug 19, 2016 11:07 pm IST

कानपुर: गंगा नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाने की नमामि गंगे परियोजना का पहला चरण इसी साल अक्तूबर से शुरू होगा और दो बरस में इसके नतीजे दिखने लगेंगे। इस काम से ज्यादा से ज्यादा

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कानपुर: गंगा नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाने की नमामि गंगे परियोजना का पहला चरण इसी साल अक्तूबर से शुरू होगा और दो बरस में इसके नतीजे दिखने लगेंगे। इस काम से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती गंगोत्री से गंगासागर तक पैदल यात्रा भी करने को तैयार हैं। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत आज यहां विभिन्न परियोजनाओं की शुरूआत करते हुए उमा भारती ने कहा कि गंगा किनारे जैविक खेती होनी चाहिए और गंगा में गिरने वाले नाले तत्काल बंद होने चाहिएं। इसके साथ ही उन्होंने उद्योगों से प्रदूषित पानी बिना शोधन गंगा में जाने पर रोक लगाने की भी हिमायत की। उन्होंने लोगों से कहा कि वह गंगा के स्वच्छ होने तक इसका जल अपने पूर्वजों को अर्पण न करें क्योंकि जो पानी आप पी नहीं सकते वह अपने मृत परिजन को अर्पण क्यों करना।

उन्होंने कहा कि विभाग ने विदेशों की नदियों की सफाई की जो रिपोर्ट मंगाई है उसके अनुसार वहां भी बड़ी नदियों की सफाई में 20 से 25 साल का समय लगा था लेकिन हम गंगा की सफाई इससे कम समय में कर लेंगे और इसकी पहली झलक अक्टूबर 2018 तक गंगा सफाई अभियान के पहले चरण के बाद दिखने लगेगी। उन्होंने कहा कि गंगोत्री से गंगासागर तक गंगा किनारेे बसे गांवों से करीब पांच से छह हजार नाले गंगा में रोज गंदगी बहाते है। गंगा की सफाई के अभियान में इन तमाम लोगों को जोड़ने के लिए वह अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से सलाह लेकर गंगोत्री से गंगासागर तक पैदल यात्रा करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि गंगा नदी में गिरने वाले नाले, औद्योगिक इकाइयों का कचरा और नदी किनारे हो रही खेती से कीटनाशक और रसायनिक तत्वों का पानी में बहना इसके प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह हैं। पिछले सवा सौ साल में गंगा नदी की सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया गया इसलिये आज इसका पानी पीने लायक भी नहीं रहा।

उमा भारती ने कहा कि कृषि मंत्रालय के सहयोग से वह चाहती है कि गंगा के किनारे केवल आर्गेनिक खेती हो ताकि पेस्टीसाइड का जहर गंगा में न जाए। इसी तरह गंगा किनारे गाय पाली जाएं। उनका सुझाव है कि गंगा के किनारे होने वाली खेती अथवा डेयरी उत्पादन गंगा के नाम से हो ताकि लोगों को उसकी शुद्धता का भरोसा हो। उन्होंने गंगा चाकलेट बनाने की बात भी कही।

उन्होंने कहा कि गंगा किनारे के इलाकों ने देश को अनेक महापुरूष दिए हैं। पूरे देश में गंगा किनारे जो भी रिवर फ्रंट बनें उनके नाम इन महापुरूषों के नाम पर रखे जाएं।

कानपुर के टेनरी चमड़ा उद्योग के प्रदूषण के बारे में भारती ने कहा कि टेनरियों को बंद करना इसका उपाय नहीं है क्योंकि इससे लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि कानपुर में टेनरियों के लिये 700 करोड़ की लागत से पानी को साफ करने की इकाई ईटीपी बनवाने को तैयार हैं, लेकिन इसके रखरखाव का खर्च टेनरी वालों को उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वह टेनरी का यह साफ पानी भी गंगा नदी में बहाने के हक में नहीं हैं। इसकी बजाय इसका इस्तेमाल बागवानी या अन्य खेती के कामों में होना चाहिए।

इस अवसर पर कानपुर के सांसद मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि दुनिया में दस नदियां खत्म हो रही हैं, जिनमें गंगा भी एक है । उन्होंने कहा कि गंगा केवल नदी नहीं बल्कि भारत की आत्मा है इसलिये गंगा की सफाई में सबको एकसाथ एकजुट होकर काम करना चाहिये। उन्होंने गंगा प्रदूषण के लिये देश के राजनीतिक नेताओं को भी जिम्मेदार ठहराते हुये कहा कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय और डा. राम मनोहर लोहिया के अलावा किसी भी नेता ने गंगा नदी के बारे में कभी कुछ नही सोचा। इस अवसर पर उमा भारती ने कानपुर में नमामी गंगे के तहत कई परियोजनाओं की शुरूआत की।

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