नई दिल्ली: एनडीटीवी इंडिया अपने प्रसारण पर एक दिन की रोक के विरोध में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। भारत सरकार ने हिंदी टीवी चैनल एनडीटीवी इंडिया को 9 नवंबर को ऑफ-एयर करने का आदेश दिया था। ये आदेश भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भेजा है और इसका संबंध पठानकोट हमलों की कवरेज से जुड़ा है। पठानकोट हमलों के दौरान टीवी चैनलों की कवरेज़ को लेकर एक उच्च स्तरीय पैनल का गठन हुआ था।
पैनल के अनुसार एनडीटीवी इंडिया ने पठानकोट हमले की कवरेज़ के दौरान सामरिक रूप से संवेदनशील सूचनाएं प्रसारित की थीं। इस पैनल ने ही एनडीटीवी इंडिया के कवरेज़ पर आपत्ति जताते हुए इसे एक दिन के लिए ऑफ एयर करने की सिफारिश की थी।
एनडीटीवी ने एक बयान जारी कर कहा था कि उनका कवरेज बिल्कुल संतुलित था और इस तरह से उन्हें निशाना बनाया जाना सही नहीं है। कंपनी के अनुसार अधिकतर अखबारों और चैनलों ने पठानकोट हमलों की कमोबेश एक जैसी कवरेज की थी।
शेयर बाजारों को भेजी सूचना में एनडीटीवी ने कहा है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने उसके हिंदी चैनल एनडीटीवी इंडिया पर नौ नवंबर, 2016 की रात बारह बजकर एक मिनट से लेकर 10 नवंबर, 2016 की रात बारह बजकर एक मिनट तक, एक दिन के प्रसारण या पुन: प्रसारण पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।
कंपनी की ओर से कहा गया है, एनडीटीवी लिमिटेड और अन्य ने इस आदेश के खिलाफ माननीय उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका दायर की है, इसके साथ ही आदेश की संवैधानिक वैधता तथा उस कानून के प्रावधानों को चुनौती दी है जिसके तहत इस आशय का आदेश जारी किया गया है।
सूत्रों ने बताया कि प्रसारण पर निर्धारित पाबंदी से एक दिन पहले, कल एक वरिष्ठ वकील द्वारा इस मामले का उल्लेख करने की संभावना हैै।
एनडीटीवी ने अपनी वेबसाइट पर एक दिन के सरकारी प्रतिबंध को चुनौती देने की जानकारी दी है।
एनडीटीवी ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि अन्य चैनलों और अखबारों ने भी इसी तरह की जानकारी दी थी। चैनल ने अपनी वेबसाइट पर कहा है कि प्रतिबंध की पत्रकारों और संपादकों ने व्यापक निंदा की और सभी प्रेस परिषदों ने इसकी तुलना 1970 के आपातकाल से की जब प्रेस की स्वतंत्रता समेत मूलभूत संवैधानिक अधिकारों का खुलेआम उल्लंघन किया गया था।