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NGT का सुझाव, क्यों न दिल्ली में डीजल बसों का प्रवेश बंद हो

 Written By: Bhasha
 Published : Dec 18, 2016 11:28 am IST,  Updated : Dec 18, 2016 01:13 pm IST

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने दिल्ली के छह पड़ोसी राज्यों से कहा है कि उनके यहां से राष्ट्रीय राजधानी में आने वाली डीजल बसों के संचालन को पूरी तरह बंद कर देने का उन्हें निर्देश क्यों ना दिया जाए।

ngt suggests to ban diesel buses in delhi- India TV Hindi
ngt suggests to ban diesel buses in delhi

नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने दिल्ली के छह पड़ोसी राज्यों से कहा है कि उनके यहां से राष्ट्रीय राजधानी में आने वाली डीजल बसों के संचालन को पूरी तरह बंद कर देने का उन्हें निर्देश क्यों ना दिया जाए।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सर्दियों के मौसम में खराब गुणवत्ता वाली वायु के मद्देनजर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा से कहा है कि वह सीएनजी वाहनों को पूरी तरह से अपनाने और बसों में पर्याप्त ईंधन का मुद्दा सुलझाने के लिए अतिरिक्त ईंधन सिलेंडर वाली बसों की खरीद के बारे में स्पष्ट निर्णय ले।

पीठ ने कहा, हमें बताया गया है कि निर्धारित मानकों की तुलना में व्यापक वायु गुणवत्ता बेहद खराब है और प्रदूषण के कारण पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर मुद्दे उठ रहे हैं। आनंद विहार, पड़पड़गंज और साहिबाबाद क्षेत्र में तो वायु गुणवत्ता खासी खराब है।

इसमें आगे कहा गया, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की ओर से पेश अधिवक्ताओं को कहा जाता है कि वे अपनी सरकारों से इस बारे में स्पष्ट निर्देश लें कि उन्हें दिल्ली आने वाली या दिल्ली से होकर गुजरने वाली डीजल बसों के संचालन को पूरी तरह रोक देने और इनकी बजाए सीएनजी बसोंं चलने का निर्देश क्यों ना दिया जाए।

NGT ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह पटपड़गंज, साहिबाबाद और आनंद विहार में उद्योगों के कारण होने वाले वायु प्रदूषण के बारे में पूरी और विस्तृत जानकारी एक हफ्ते के भीतर मुहैया करवाए। इसमें कहा गया है कि इन क्षेत्रों में औद्योगिक इकाईयों के कारण निकलने वाले प्रदूषक तत्व किस प्रकार के हैं और यह भी बताएं कि इस बारे में उन्होंने क्या कदम उठाए हैं। मामले की अगली सुनवाई 23 दिसंबर को होगी।

गत अक्तूबर माह में हरित पैनल ने राज्यों को सीएनजी वाहनों के बारे मे स्पष्ट नीति नहीं बनाने के लिए कड़ी फटकार लगाई थी और सीएनजी नहीं अपनाने की स्थिति में राज्य परिवहन को रोक देने की चेतावनी दी थी। हरित अधिकरण ने कहा था कि दिल्ली में ज्यादातर प्रदूषक तत्व वहीं से उत्पन्न होते हैं।

पीठ कौशांबी अपार्टमेंंट्स रेंजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन :कारवा: की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अपनी याचिका में कारवा ने कहा है कि कौशांबी में 200 मीटर की परिधि में दो बस टर्मिनल हैं जिनके कारण इलाके में प्रदूषण गहरा रहा है। याचिका में कौशांबी बस स्टैंड को किसी अन्य स्थान पर स्थापित करने की मांग की गई है।

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