नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G-20 सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन पहुंचने से पहले वियतनाम का दौरा करेंगे। दौरे पर रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि उनकी सरकार वियतनाम के साथ द्विपक्षीय संबंधों को उच्च प्राथमिकता देती है और दोनों देशों के बीच साझीदारी से एशिया और शेष विश्व को लाभ होगा।
क्यों अहम है मोदी की वियतनाम यात्रा ?
चीन से पहले वियतनाम की मोदी की यह यात्रा कई मायनों में बेहद अहम है। अभी हाल में यूनाइटेड नेश्न्स की परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने दक्षिण चीन सागर पर चीन के ऐतिहासिक एकाधिकार को खत्म करने का फैसला सुनाया है। इस फैसले को चीन ने मानने से इनकार कर दिया और दक्षिण चीन सागर में सैनिक गतिविधियों को बढ़ा दिया है। वहीं यूनाइटेड नेशंस के इस फैसले से वियतनाम को काफी लाभ मिलनेवाला है।
दक्षिण चीन सागर क्षेत्र पर है नजर
दक्षिण चीन सागर पर आए फैसले से भारत की भी कई अड़चनें दूर हो जाएंगी। भारत का फीसदी समुद्री व्यापार इसी रास्ते से होता है। वहीं इस इलाके में तेल और गैस की की संभावनाओं की तलाश में भी भारत जुटा है। लेकिन चीन अपने हठ पर कायम है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री मोदी की वियतनाम यात्रा में दोनों देशों के बीच दक्षिण चीन सागर पर अहम चर्चा होने की उम्मीद है।
चीन के साथ विवाद
भारत की तरह वियतनाम भी चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर परेशानियां झेलता रहा है। वहीं आतंकवाद के मुद्दे पर चीन का पाकिस्तान को समर्थन करना भारत के लिए लगातार मुश्किलें खड़ी कर है। हाल में एनएसजी में स्थाई सदस्यता के मुद्दे पर भारत को चीन का विरोध झेलना पड़ा। ऐसे हालात में वियतनाम के साथ द्विपक्षिय संबंधों को मजबूत करना जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक विशेष पहल मानी जाएगी।
डिफेंस के क्षेत्र में समझौता
दोनों देशों के बीच डिफेंस के क्षेत्र में बड़ा समझौता होने की उम्मीद है। वियतनाम भारत से ब्रह्मोस मिसाइल और एंटी-सबमरीन टारपीडो अरुणास्त्र जैसे अहम हथियार खरीद सकता है। इससे वियतनाम की सैन्य क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी और पूरे इलाके में चीन के प्रभुत्व को चुनौती मिल सकती है।
मोदी की यात्रा के कूटनीतिक मायने
दक्षिण चीन सागर में चीन का वर्चस्व खत्म होने से वियतनाम और भारत दोनों को काफी राहत मिलेगी। इस क्षेत्र से अपना प्रभुत्व नहीं हटाने के चीन के अड़ियल रवैए को देखते हुए भारत और वियतनाम का करीब आना लाजिमी है। भारत रक्षा समझौतों के जरिए वियतनाम की रक्षा पंक्ति को मजबूत करेगा। यह ठीक उसी तरह का होगा जैसे चीन हमेशा पाकिस्तान की मदद करता रहा है। एनएसजी में भारत को चीन का विरोध सहना पड़ा। इससे एनएसजी में भारत की स्थाई सदस्यता की कोशिश को बड़ा धक्का लगा। ऐसे समय में चीन पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी वियतनाम का दौरा कर चीन को यह साफ संदेश देना चाहते हैं कि वह अपनी हरकतों से बाज आए साथ ही पूरे क्षेत्र शांति और अमन के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करे।