नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सूखा प्रभावित राज्यों से बुधवार को अपील की कि वे सूखे से लड़ने के लिए तुरंत कदम उठाएं और उसकी प्रत्येक सप्ताह समीक्षा करें। विपक्ष ने सरकार के पास सूखे से निपटने के लिए कथित तौर पर कोई प्रभावी सूखा प्रबंधन योजना न होने का आरोप लगाया था। केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "मैं सूखा प्रभावित राज्यों से अपील करता हूं कि वे सूखे से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाएं और हालात की साप्ताहिक स्तर पर समीक्षा करें।"
उन्होंने कहा कि राज्यों की योजना पेयजल की कमी से निपटने, खेती के लिए तालाबों का निर्माण करने, सूक्ष्म सिंचाई परियोजना अपनाने तथा कम पानी वाले फसलों की बुआई पर विशेष तौर पर केंद्रित होनी चाहिए। कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले कई दिनों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सूखा प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठक कर रहे थे। प्रधानमंत्री की आखिरी बैठक 17 मई को आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई। इसके पहले प्रधानमंत्री तेलंगाना, झारखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर चुके हैं।
मंत्री ने कहा, "जल संरक्षण तथा जल सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए राज्यों को नवाचार व प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करना चाहिए।" उन्होंने कहा कि राज्यों को जल संरक्षण तथा भंडारण को बढ़ावा देने चाहिए तथा जलाशयों को पुनर्जीवित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अन्य उपायों में जल संरक्षण, सिंचाई तालाबों की गाद निकाले जाने, वर्षा जल संचयन, भूमिगत जल रिचार्ज, पनधारा विकास इत्यादि के लिए एकीकृत कार्य योजना विकसित की जानी है। रोक बांधों, रिसन तालाबों का रख रखाव, नहरों की लाईनिंग, वितरण नेटवर्क में जल रिसाव तथा चोरी को रोकने को प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि केंद्र तथा राज्यों द्वारा जल की कमी से निपटने के लिए लघु व दीर्घ दोनों ही उपाय अपनाए जाने चाहिए और इसमें स्थानीय स्वशासन निकायों को भी शामिल करना चाहिए। मंत्री ने कहा कि क्षेत्रों के मानचित्रण के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड का विश्लेषण और उपयोग तथा फसलों के लिए वैज्ञानिक सलाह जो ऐसे क्षेत्रों के लिए सर्वाधिक अनुकूल हो, करना होगा।