नई दिल्ली: रेलवे अब ट्रेनों में मनोरंजन सेवाओं के जरिए विज्ञापन जुटाकर अपनी आय बढ़ाना चाहता है इसके लिए रेलवे ने रेडियो प्रसारण के क्षेत्र में कदम रखने की योजना बनाई है। रेल मंत्रालय के आंकड़ों में ट्रेनों में विज्ञापन के जरिए सालाना 100 करोड़ रुपए की आय होने का अनुमान है। पिछले साल रेलवे की विज्ञापन से कुल आय 263 करोड़ रुपए रही थी।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस उद्देशय के लिए स्पीकर और एंप्लीफायर लगाने पर पूंजीगत व्यय करीब 40 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जबकि परिचालन खर्च सालाना करीब तीन करोड़ रुपए रहने की संभावना है। यह खर्च इस प्रोजेक्ट का ठेका लेने वाली कंपनी खर्च करेगी। इसका ठेका राजस्व हिस्सेदारी मॉडल पर सबसे ऊंची बोली लगानेवाले को दिया जाएगा।
इस पब्लिक एड्रेस सिस्टम का इस्तेमाल गाड़ी के आवागमन से जुड़ी सूचनाओं के लिए भी हो सकेगा। सूत्रों ने कहा कि वर्तमान में मंत्रालय अपने संपूर्ण नेटवर्क पर व्यापक पहुंच के लिए इंटरनेट आधारित रेडियो पर विचार कर रहा है, लेकिन उसने वैकल्पिक प्रौद्योगिकी या माध्यम का विकल्प खुला रखा है।
ट्रेन पर लगा एक सर्वर, इंटरनेट नेटवर्क उपलब्ध होते ही कंटेंट डाउनलोड करेगा और छह से आठ घंटे तक का कंटेंट स्टोर करके रखेगा जिससे कि सुदूर इलाकों जहां इंटरनेट कवरेट उपलब्ध नहीं है, से गुजरने वाली ट्रेन में निर्बाध रूप से कार्यक्रम चलते रहें।
रोजाना टिकट लेकर यात्रा करने वाले 2.3 करोड़ यात्रियों के साथ रेलवे को इस परियोजना के क्रियान्वयन के बाद 10 प्रतिशत रेडियो श्रोताओं पर अपनी पकड़ स्थापित होने की उम्मीद है।
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