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Rajat Sharma's Blog: अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक सभी पक्षों को बयानबाजी से बचना चाहिए

 Published : Oct 17, 2019 04:18 pm IST,  Updated : Oct 17, 2019 04:18 pm IST

 दोनों पक्षों ने यह बात मानी कि अदालत में जिस तरह से सुनवाई हुई, उससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। इसलिए ये कहा जा सकता है कि अब अगले महीने अदालत का जो फैसला आएगा, उससे किसी को कोई गिला-शिकवा नहीं होगा।

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Rajat Sharma's Blog: Let all sides refrain from comments till SC gives its verdict on Ayodhya  Image Source : INDIA TV

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा 40 दिन की मैराथन बहस के बाद 150 साल पुराने अयोध्या विवाद पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। 5 जजों की कॉन्स्टिट्यूशन बेंच की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं। उम्मीद की जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अपना फैसला चीफ जस्टिस के रिटायरमेंट के पहले सुना देगी।

यह फैसला हिंदू और मुस्लिम पक्षों द्वारा दायर क्रॉस-अपीलों पर दिया जाएगा जो पिछले 70 वर्षों से 2.77 एकड़ के विवादित स्थल पर स्वामित्व का दावा कर रहे हैं। इन पक्षों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2010 के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें विवादित जमीन को रामलला, निर्मोही अखाड़ा और यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ के मुद्दे पर लिखित दलील दाखिल करने के लिए शनिवार तक का समय दिया है। सुनवाई के आखिरी दिन ड्रामेबाजी भी देखने को मिली जब मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने हिंदू महासभा द्वारा पेश किए गए एक नक्शे को फाड़ दिया जिसमें ‘भगवान राम की जन्मभूमि के सटीक स्थान’ को दिखाया गया था। धवन ने बाद में कहा कि उन्होंने नक्शे को इसलिए फाड़ा क्योंकि चीफ जस्टिस ने उनसे कहा था कि अप्रासंगिक लगने पर वह नक्शे को फाड़ सकते हैं।

सुबह उस समय भ्रम की स्थिति पैदा हो गई जब शुरू में यह बताया गया कि यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड अपनी अपील वापस लेने के लिए तैयार हो गया है। वक्फ बोर्ड प्रमुख ने बाद में इस रिपोर्ट का खंडन कर दिया। हालांकि, दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त किए गए मध्यस्थता पैनल ने कथित रूप से शीर्ष अदालत को एक सीलबंद लिफाफे में सूचित किया है कि मुस्लिम पक्षकार राम मंदिर के निर्माण के लिए जमीन पर अपना दावा छोड़ने के लिए मान गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, जिन पार्टियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए, उनमें सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्वाणी अखाड़ा, हिंदू महासभा और राम जन्मस्थान पुनरुद्धार समिति शामिल हैं।

ये बड़ी बात है कि सुप्रीम कोर्ट के जजों ने लगातार चालीस दिन तक सुनवाई की, सभी पक्षों को सुना, सबको अपनी दलील रखने, सबूत रखने और दूसरे के तर्कों पर जिरह करने का पूरा मौका दिया। दोनों पक्षों ने यह बात मानी कि अदालत में जिस तरह से सुनवाई हुई, उससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। इसलिए ये कहा जा सकता है कि अब अगले महीने अदालत का जो फैसला आएगा, उससे किसी को कोई गिला-शिकवा नहीं होगा।

मुझे पूरी उम्मीद है कि अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सभी पक्ष सम्मान करेंगे। हालांकि, सभी पक्षों को ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा और ऐसी अटकलों, अफवाहों या भड़काऊ टिप्पणियों को तवज्जो देने से बचना होगा जो बेवजह भावनाओं को भड़काने का काम करें। सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला सुनाए जाने तक सभी पक्षों को अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए। (रजत शर्मा)

देखिए, 'आज की बात' रजत शर्मा के साथ, 16 अक्टूबर 2019 का पूरा एपिसोड

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