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सहारा समूह प्रमुख सुब्रत राय की परोल 3 अगस्त तक बढ़ी

 Written By: IANS
 Published : Jul 12, 2016 08:33 am IST,  Updated : Jul 12, 2016 08:33 am IST

नई दिल्ली: सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय को राहत देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को उनकी परोल की अवधि 3 अगस्त तक बढ़ा दी है। हालांकि इसके साथ ही उन्हें 300 करोड़ रुपये

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नई दिल्ली: सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय को राहत देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को उनकी परोल की अवधि 3 अगस्त तक बढ़ा दी है। हालांकि इसके साथ ही उन्हें 300 करोड़ रुपये जमा कराने को कहा गया है। न्यायमूर्ति टी. एस. ठाकुर की अगुवाई वाली खंडपीठ ने कहा कि रॉय को 3 अगस्त तक 300 करोड़ रुपये जमा कराने होंगे। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके साथ परोल पर रिहा हुए सहारा के दो अन्य अधिकारियों को वापस तिहाड़ जेल जाना होगा।

न्यायमूर्ति टी. एस. ठाकुर, न्यायमूर्ति अनिल आर. दवे औ न्यायमूति ए. के. सीकरी ने इसके अलावा जेल में बंद रवि शंकर दूबे की रिहाई के आदेश भी जारी किए।

राय को इस साल अपनी मां के अंतिम संस्कार में शमिल होने के लिए 6 मई को परोल मिली थी। उनकी मां की 5 मई को मौत हो गई थी। उनके साथ उनके दामाद अशोक रॉय चौधरी को भी 6 मई को परोल पर रिहा किया गया था। इस परोल को 200 करोड़ रुपये जमा कराने की शर्त पर 11 मई को दो महीने के लिए बढ़ा दिया गया। राय के बढ़े हुई परोल का आखिरी दिन सोमवार था।

सहारा प्रमुख को दो अन्य निदेशकों दुबे और रॉय चौधरी के साथ 4 मार्च 2014 को जेल भेजा गया था क्योंकि उन्होंने निवेशकों के 17,600 करोड़ रुपये 15 फीसदी ब्याज के साथ लौटाने के साल 2012 में दिए गए आदेश की अवहेलना की थी।

उन्होंने दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल स्टेट कॉर्प. लि. और सहारा हाउसिंग फाइनैंस कॉर्प. लि. के द्वारा पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर (ओएफसीडी) के माध्यम से साल 2007 से 2008 के दौरान निवेशकों से धन जुटाया था।

राय को राहत देते हुए खंडपीठ ने सहारा उसकी संपत्तियों को मौजूदा सर्किल दर के 90 फीसदी से कम कीमत पर नहीं बेचने की अनुमति भी दी। यह शर्त सेबी द्वारा सहारा की संपत्तियों को बेचकर पैसा जुटाने के लिए लगाई गई है।

सहारा को अपनी संपत्तियों को बेचने की अनुमति देते हुए अदालत ने कहा, "हमने सेबी को 19 संपत्तियों को बेचने की अनुमति दी है जिसमें तीन होटल और एंबी वैली की जमीन शामिल है। हमें सूचना मिली है कि इनसे ज्यादा कुछ हासिल नहीं हो रहा है, क्योंकि हमारे पहले के आदेश में निर्धारित वजह से ऐसा हो रहा है।"

गौरतलब है कि सेबी ने भी सहारा के पहले के आदेश में बदलाव का कोई विरोध नहीं किया और सहारा को अपनी संपत्तियों को बेचने की अनुमति दी। खंडपीठ ने कहा कि इनके बिक्री के दौरान हुए खर्च और कर को स्त्रोत पर ही जमा करवा दिया जाए और बचे हुए पैसे बाजार निवेशक सेबी के पास जमा किए जाएं।

खंडपीठ ने सहारा को अपने बैंक ऑफ चायना के खाते से 2.4 करोड़ डॉलर रुपये सेबी-सहारा के खाते में जमा कराने की अनुमति भी दे दी।

अदालत ने इसके अलावा सेबी को सहारा के म्यूचुअल फंड, शेयर और सोने से हासिल रकम की स्थिति रिपोर्ट जमा करने को कहा। यह आदेश सहारा के वकील सिब्बल द्वारा खंडपीठ को यह बताने पर दिया गया कि सेबी इनसे प्राप्त आय की जानकारी नहीं दे रही है।

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