गुवाहाटी: असम का मुख्यमंत्री पद संभालने के एक महीने से भी कम समय के भीतर बीते बुधवार को कई जगहों पर सर्वानंद सोनोवाल के पुतले जलाए गए। जरूरी सामानों पर मूल्य वर्धित कर (वैट) बढ़ाने और एलपीजी, पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में इजाफे के विरोध में सोनोवाल के पुतले जलाए गए। कुछ स्थानीय संगठनों की ओर से सोनोवाल के विधानसभा क्षेत्र माजुली में उनके पुतले फूंके गए। इन संगठनों ने ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के साथ एक विरोध मार्च भी निकाला।
वैट में इजाफे के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) के राज्य सचिव माधुर्य बरूआ ने बताया कि सोनोवाल के पुतले गोलाघाट में भी जलाए गए। कीमतों में इजाफे के विरोध में आसू ने बुधवार शाम कई जिलों में टॉर्च लाइट मार्च निकाला।
आसू के महासचिव लुरिनज्योति गोगोई ने बताया कि असम के लोगों ने भाजपा को इसलिए वोट दिया क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि अच्छे दिनों के लिए परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा, लोगों ने जिस अच्छे दिन के लिए वोट किया, वह यह तो नहीं है। उन्होंने (भाजपा ने) कीमतों में बढ़ोत्तरी पर नियंत्रण का वादा किया था। लेकिन सरकार बनाने के एक महीने बाद ही उन्होंने आम लोगों का बोझ बढ़ा दिया है।