नई दिल्ली: कॉल ड्रॉप मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसला सुनाते हुए TRAI के फ़ैसले पर रोक लगा दी है। कोर्ट द्वारा दिए गए आज के फैसले के मुताबिक, अब कस्टमर कॉल ड्रॉप के लिए मुआवजा नहीं मांग सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि ट्राई का आदेश मनमाना और नॉन ट्रांसपेरेंट है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से टेलिकॉम कम्पनियों को बड़ी राहत मिली है। इस बारे हाई कोर्ट का फैसला भी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है।
हाई कोर्ट ने कहा था कि कॉल ड्राप पर मोबाइल कंपनियों को मुआवजा देना होगा। 1 जनवरी, 2016 से मुआवजा देना होगा। ट्राई ने 16 अक्टूबर 2015 को आदेश जारी किया था कि मोबाइल सर्विस कंपनियां कॉल ड्राप होने की दशा में 1 रुपया उपभोक्ता को बतौर मुआवजा देंगी जो एक दिन में 3 रुपये हो सकता है।
क्या था ट्राई का प्रस्ताव
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकार (ट्राई) के प्रस्ताव के अनुसार कॉल शुरू होने के पांच सेकंड के भीतर कॉल ड्रॉप होने पर कोई चार्ज नहीं लगता। अगर पांच सेकंड के बाद कॉल ड्रॉप होती तो उतना ही चार्ज लगता जितनी कॉल हुई है।
यानि कि एक रुपए प्रतिमिनट कॉल प्लान के दौरान 30 सेकंड में कॉल ड्रॉप हो जाती है तो 30 सेकंड का ही चार्ज लगता। वहीं कॉल ड्रॉप के ऐवज में सर्विस प्रोवाइडर कंपनी को इसके लिए ग्राहक को एक रुपए का हर्जाना भी देना पड़ता। ट्राई के मुताबिक कॉल ड्रॉप की यह भरपाई दिन में तीन कॉल ड्रॉप तक सीमित रखी गई थी।