नई दिल्ली: सहारनपुर में हिंसा की घटनाओं को काबू में नहीं कर पाने की विफलता की गाज डीएम और एसपी पर गिरी है। डीएम एनपी सिंह और एसपी सुभाष चंद्र दूबे को सस्पेंड कर दिया गया है जबकि इलाके के कमिशनर और डीआईजी का ट्रांसफर कर दिया गया है। वहीं एहतियात के तौर पर मोबाइल इंटरनेट पर रोक लगा दी गई है।
बड़ागांव इलाके के शब्बीरपुर गांव में 5 मई को हुई हिंसा के बाद लगातार हालात बिगड़ते रहे। बुधवार को भी एक शख्स की गोलीमार कर हत्या कर दी गई। इस हिंसा में अबतक 3 लोगों की मौत हो चुकी है। दलितों के 60 मकान जला दिए गए हैं। प्रदेश के गृह सचिव, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी जिले में कैंप किए हुए हैं और लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
शब्बीरपुर गांव में 5 मई को महाराणा प्रताप शोभायात्रा के दौरान डीजे बजाने को लेकर ठाकुरों और दलितों के बीच झगड़ा हो गया था और ठाकुर पक्ष के एक शख्स की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद दलितों के 60 से ज्यादा मकान जला दिए गए और कई गाड़ियों में आग लगा दिया। इस घटना का दलितों की भीम आर्मी ने विरोध किया। दलितों को इंसाफ दिलाने के लिए 9 मई को सहारनपुर में दलित इकट्ठे हुए। पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की इसपर दलित भड़क गए। जिले में 9 जगह हिंसा हुई। दुकानों और गाड़ियों में आग लगा दी गई। इस केस में भीम आर्मी के चंद्रशेखर को नामजद किया गया।
मंगलवार को बीएसपी प्रमुख मायावती शब्बीरपुर गांव पहुंची और एक जनसभा को संबोधित किया। मायावती की सभा के बाद लौट रहे काफिले की गाड़ी पर हमला हुआ। इसमें करीब पांच लोग घायल हो गए। एक शख्स की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद हालात एकबार फिर तनावपूर्ण हो गए।