पटनाः बिहार में एक अप्रैल से शराबबंदी के बाद राज्य सरकार ने शराब कारोबारियों को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत दूध के व्यापार से जोड़ने की पहल भले ही शुरू कर दी हो, लेकिन शराब बेचने वालों को दूध बेचने का धंधा नहीं भा रहा है।
राज्य में शराबबंदी के 45 से ज्यादा दिन बीत जाने के बाद करीब 5500 दुकानदारों में से मात्र 27 दुकानदारों ने शराब की जगह दूध बेचने को राजी हुए। सरकारी स्तर पर दूध का व्यवसाय करने वाली एजेंसी बिहार स्टेट मिल्क कोऑपरेटिव फेडरेशन (कम्फेड) के समक्ष 27 शराब दुकानदारों की अर्जी आई है। आवेदन देने वाले सभी दुकानदार पटना के ही हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में शराबबंदी लागू करते समय कहा था कि जाहिर है, शराबबंदी के बाद इससे जुड़े लोग बेरोजगार होंगे। ज्यादातर शराब की दुकानें मुख्य स्थानों पर हैं, ऐसे में यहां डेयरी केंद्र खोला जाएगा तथा शराब की दुकान चलाने वाले लोगों को रोजगार प्रदान करेगा।
कॉम्फेड के एक अधिकारी ने बताया कि पटना के बाहर किसी भी जिले में एक भी शराब दुकानदार ने दूध बेचने को आगे नहीं आए हैं। पांच अप्रैल को सरकार ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी थी। उस समय शराबबंदी के बाद खाली हुए शराब के दुकानों में सुधा दूध व अन्य दूध पर आधारित वस्तु बेचने का लाइसेंस देने का ऑफर दिया गया था।
कम्फेड की प्रबंध निदेशक सीमा त्रिपाठी ने बताया कि राज्य में अब तक 27 शराब विक्रेताओं ने पूर्व की शराब दुकानों में दूध बेचने के लिए लाइसेंस लिया है। वैसे, कई शराब दुकानदारों ने कॉम्फेड से दूध बेचने के लाइसेंस के लिए संपर्क किया है।
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