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नार्को टेस्ट क्या होता है? जिसके लिए राजी हो गया आफताब, समझें पूरा प्रोसेस

अब नार्कों के लिए आफताब अमीन पूनावाला राजी हो चुका है। सूत्रों ने कहा कि साकेत की एक अदालत ने शुक्रवार को रोहिणी फोरेंसिक साइंस लैब को पांच दिनों के भीतर परीक्षण करने का आदेश दिया है।

Edited By: Ravi Prashant @iamraviprashant
Published : Nov 18, 2022 08:38 pm IST, Updated : Nov 18, 2022 08:59 pm IST
नार्कों टेस्ट क्या होता है?- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO नार्कों टेस्ट क्या होता है?

हर रोज श्रद्धा मर्डर केस में नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस आफताब के खिलाफ पुख्ता सबूत इकठ्ठा करने में लगी हुई है ताकि पुलिस का पक्ष कोर्ट में मजुबत रहें। पुलिस हर पहलुओं से जांच करने में लगी है। पुलिस छानबीन के सिलसिले में बार-बार महरौली के जंगलों में सबूत खंगालने के लिए पहुंच रही है। इसके अलावा जंगलों में कड़े पहरे भी लगाए गए हैं। इसी बीच आफताब का नार्कों होने जा रहा है।

आफताब नार्को के लिए हुआ राजी 

अब नार्कों के लिए आफताब अमीन पूनावाला राजी हो चुका है। सूत्रों ने कहा कि साकेत की एक अदालत ने शुक्रवार को रोहिणी फोरेंसिक साइंस लैब को पांच दिनों के भीतर परीक्षण करने का आदेश दिया है। दिल्ली पुलिस ने नार्को टेस्ट के लिए आवेदन किया था क्योंकि आफताब जांच में सहयोग नहीं कर रहा था। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि आखिर ये नार्कों टेस्ट क्या होता है। क्या इसमें अपराधी सच बोलने लगते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि नार्को टेस्ट क्या होता है। 

नार्को टेस्ट क्या होता है?
नार्को टेस्ट में व्यक्ति के शरीर में सोडियम पेंटोथल (थियोपेंटोन) नामक दवा इंजेक्ट की जाती है, जो उसे 'सम्मोहक स्टेज' में डाल देती है। यह एक व्यक्ति की आत्म-चेतना (सोचने की क्षमता) को कम करता है और वह खुलकर बोलना शुरू कर देता है। इसलिए इस दवा को ट्रूथ सीरम भी कहा जाता है। यानी आसान भाषा समझे कि इस अवस्था में व्यक्ति ना तो पूरी तरह से होश में होता और ना ही बेहोश होता है।  

गलत खुराक ले सकती जान 
व्यक्ति को कितनी खुराक देनी होती है इसे पहले व्यक्ति की उम्र और शरीर की स्थितियों पर निर्भर करता है। वहीं गलत खुराक का परिणाम किसी व्यक्ति को मौत या कोमा में भी पहुंचा सकता है। 

टेस्ट में कौन-कौन शामिल होते हैं?
भारत में नार्को टेस्ट करने वाली टीम में एक एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, एक मनोचिकित्सक, एक नैदानिक/फोरेंसिक मनोवैज्ञानिक, एक ऑडियो-वीडियोग्राफर और सहायक नर्सिंग स्टाफ शामिल होते हैं। जांच के दौरान केस से जुड़े अधिकारी भी मौजूद रहते हैं। 

नार्को टेस्ट भी 100 प्रतिशत सटीक नहीं
व्यक्ति को इंजेक्शन लगाने के बाद पूछताछ की प्रक्रिया शुरू होती है। माना जाता है कि नार्को टेस्ट जांच करने वाली टीमों द्वारा उपयोग किए जाने वाले अन्य थर्ड-डिग्री उपचारों का एक विकल्प है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षण 100 प्रतिशत सटीक नहीं है। ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां विषयों ने गलत जवाब देकर जांचकर्ताओं को चकमा दिया है।

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