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DRDO Missile Test: भारत ने किया VL-SRSAM मिसाइल का सफल परीक्षण, जानें क्या है खास

 Published : Jun 24, 2022 07:02 pm IST,  Updated : Dec 16, 2022 08:37 am IST

DRDO Missile Test: भारत ने शुक्रवार को ओडिशा के तट पर एकीकृत परीक्षण क्षेत्र, चांदीपुर से जमीन से हवा में मार करने वाली (VL-SRSAM) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है।

DRDO Missile Test(representational Image)- India TV Hindi
DRDO Missile Test(representational Image) Image Source : PTI

Highlights

  • VL-SRSAM शिप से चलने वाली एक हथियार प्रणाली है
  • "मिसाइल सिस्टम से भारतीय नौसेना की रक्षात्मक क्षमता और मजबूत होगी"
  • "पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक और मील का पत्थर है"

DRDO Missile Test: भारत ने शुक्रवार को ओडिशा के तट पर स्थित टेस्टिंग सेंटर से चांदीपुर से वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (VL-SRSAM) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इसकी जानकारी  एक आधिकारिक बयान में गई है। बयान में कहा गया है कि VL-SRSAM शिप से चलने वाला वेपन सिस्टम है। इसका उद्देश्य सीमा पर विभिन्न हवाई खतरों से निपटना है। इस मिसाइल सिस्टम के मिलने से भारतीय नौसेना की रक्षा क्षमता काफी बढ़ जाएगी।

सफल परीक्षण पर रक्षा मंत्रा ने दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मिशन की सफलता पर DRDO और भारतीय नौसेना को बधाई दी। उन्होंने ट्वीट किया, ''DRDO, भारतीय नौसेना और रक्षा उद्योग को चांदीपुर, ओडिशा के तट पर वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल के सफल उड़ान परीक्षण के लिए बधाई। यह सफलता हवाई खतरों के खिलाफ भारतीय नौसेना के जहाजों की रक्षा क्षमता को और बढ़ाएगी।'' बयान में कहा गया है कि वाहन के उड़ान पथ की निगरानी चांदीपुर आईटीआर द्वारा तैनात कई ट्रैकिंग उपकरणों का इस्तेमाल करके की गई। परीक्षण लॉन्च की निगरानी DRDO और भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने की।” 

नौसेना प्रमुख ने की  DRDO और नेवी के प्रयासों की सरहाना

नौसेना प्रमुख एडमिरल आर.हरि कुमार ने भी नौसेना और डीआरडीओ के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस स्वदेशी मिसाइल सिस्टम के विकास से भारतीय नौसेना की रक्षात्मक क्षमता और मजबूत होगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष डॉ.जी सतीश रेड्डी ने अभियान में शामिल टीमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि हथियार प्रणाली भारतीय नौसेना के लिए लाभदायक साबित होगी और यह पीएम  मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य की दिशा में एक और मील का पत्थर है। 

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