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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव ला सकता है विपक्ष, नोटिस पर 180 सांसदों ने किया साइन

Reported By : Vijai Laxmi Edited By : Mangal Yadav Published : Mar 11, 2026 07:55 pm IST, Updated : Mar 11, 2026 07:59 pm IST

विपक्षी पार्टियों ने बुधवार को टीएमसी के उस प्रस्ताव का समर्थन किया जिसमें पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंपीचमेंट मोशन लाने का प्रस्ताव है।

चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार- India TV Hindi
Image Source : PTI चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार। फाइल

नई दिल्लीः देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष महाभियोग का प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि विपक्ष एक या दो दिन के अंदर सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव ला सकता है। सूत्रों का दावा है कि इंडिया ब्लॉक के लोकसभा में 120 और राज्य सभा में 60 सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। यह प्रस्ताव दोनों ही सदनों में विपक्ष लाएगा। सूत्रों के मुताबिक 12 या 13 मार्च को यह प्रस्ताव विपक्षी सांसद सबमिट कर सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक महाभियोग के प्रस्ताव में साबित गलत व्यवहार, पक्षपातपूर्ण, भेदभावपूर्ण व्यवहार और SIR एक्सरसाइज व बड़े पैमाने पर लोगों को वोट देने से रोकना ये कुछ मुख्य आधार हैं जो चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग के लिए विपक्ष द्वारा लाए जाने वाले मोशन के ड्राफ्ट में बताए गए हैं। 

महाभियोग में क्या आरोप लगाए गए हैं

  1.  वोटर्स को उनके वोटिंग अधिकार से वंचित करने का आरोप है।
  2.  टीएमसी के नेताओं के साथ जब उनका डेलीगेशन चुनाव आयोग मिलने गया था, उसके साथ दुर्व्यवहार का आरोप।
  3.  संवैधानिक संस्थानों के दुरुपयोग का आरोप।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इंडिया टीवी से बातचीत में कहा कि हम संविधान का बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उसके लिए जो भी जरूरत पड़ेगी करेंगे। बता दें कि सीईसी को संविधान की आर्टिकल 324(5) के तहत हटाया जा सकता है, जिसमें जजो को हटाने वाले प्रावधान जैसे प्रावधान ही सीईसी को हटाने के लिए भी होते है। अगर विपक्ष ये प्रस्ताव लाता है तो देश के इतिहास में पहली बार होगा। 

इससे पहले 1993 में संसद की दहलीज पर खड़े होकर उस समय सिर्फ एक वकील की हैसियत से कपिल सिब्बल ने पहले महाभियोग में जस्टिस वी रामास्वामी के समर्थन में उनके वकील के तौर पर पैरवी की थी। 6 घंटे उन्होंने बहस किया था। इसके बाद उनके बतौर वकील की परफॉर्मेंस से कांग्रेस नेता इतने इंप्रेस हुए कि उन्हें पार्टी ज्वाइन करवाकर टिकट दिया। यह मोशन डिफीट हुआ था।

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