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Rajat Sharma's Blog | टैरिफ युद्ध: चीन है असली गुनहगार

 Published : Apr 09, 2025 06:02 pm IST,  Updated : Apr 09, 2025 06:02 pm IST

2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो चीन की इन अनफेयर प्रैक्टिस पर सवाल उठाए गए। ‘मेक इन इंडिया’ का अभियान शुरू किया गया। मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में चीन को चुनौती दी गई, लेकिन दुनिया के ज्यादातर मुल्क उस समय भी खामोश रहे।

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इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा। Image Source : INDIA TV

अमेरिका ने चीन से आयात होने वाली वस्तुओं पर 104 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला कर लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि वो 24 घंटे के भीतर अमेरिका पर लगाया गया 34 पर्सेंट का reciprocal टैरिफ वापस नहीं लिया, तो वो चीन से आने वाली वस्तुओं पर 50 पर्सेंट का additional tariff लगा देंगे। बुधवार को चीन सरकार के बड़े नेताओं की बैठक हुई जिसमें जवाबी कार्रवाई पर विचार हुआ। बुधवार को भारत सहित सभी एशियाई शेयर बाज़ारों में गिरावट जारी रही। चीन ने कहा है कि अमेरिका के रुख पर दुनिया के सभी देशों को मिलकर विरोध करना चाहिए और अमेरिका को WTO के नियमों का पालन करने के लिए मजबूर करना चाहिए क्योंकि अमेरिका अपने फायदे के लिए पूरी दुनिया का कारोबार चौपट कर रहा है। लेकिन सवाल ये है कि आज जो स्थिति पैदा हुई है क्या उसके लिए कौन जिम्मेदार है? ट्रम्प का टैरिफ या समस्या की जड़ में चीन है?

आज ऐसा लग रहा है कि अमेरिका चीन के पीछे पड़ा है। ये धारणा बनायी जा रही है कि अमेरिका पूरी दुनिया का एजेंडा सेट करने में लगा है लेकिन अगर टैरिफ और कारोबार के इस युद्ध की शुरुआत देखें तो पता चलेगा कि इसके लिए चीन भी उतना ही जिम्मेदार है और ये बात भारत से बेहतर कौन जानता है। चीन बाजार में सस्ता माल बेचता है, चीन की बनी वस्तुओं ने हमारे मैन्युफैक्चरिंग उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाया है। ये सिलसिला 24 साल पहले शुरू हुआ जब चीन WTO (विश्व व्यापार संगठन) का सदस्य बना। चीन ने कम लगात पर मैन्युफैक्चरिंग का नैरेटिव सेट किया, बड़ी बड़ी फैक्ट्रियां लगाईं, करोड़ों मजदूरों से सस्ते में दिन-रात काम कराया और इस माल को दुनिया भर में बेचा।

मुझे याद है 2003 में जब मैं न्यूयॉर्क में था तो जिस होटल में ठहरे थे, उसमें रखी हर चीज़ मेड इन चाइना थी। अमेरिका के मार्केट पर चीन ने लगभग कब्जा कर लिया था। उस समय किसी ने इसका विरोध नहीं किया। चीन की हरकतों से भारत और अमेरिका जैसे देशों में मैन्युफैक्चरिंग को भारी नुकसान हुआ पर उस समय किसी ने चीन से नहीं कहा कि ये गलत ट्रेड प्रैक्टिस है। चीन की तरक्की तो हुई पर चीन ने व्यापार नियमों की धज्जियां उड़ाईं। ये दुर्भाग्य की बात है कि उस समय भारत ने भी इसका विरोध नहीं किया। भारत जैसे देश चुपचाप WTO के नियमों को मानते रहे। चीन हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाता रहा और उस समय की हमारी सरकार चीन की सड़कें और चीन की फैक्ट्रियां दिखाकर चीन का महिमामंडन करती रहीं।

2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो चीन की इन अनफेयर प्रैक्टिस पर सवाल उठाए गए। ‘मेक इन इंडिया’ का अभियान शुरू किया गया। मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में चीन को चुनौती दी गई, लेकिन दुनिया के ज्यादातर मुल्क उस समय भी खामोश रहे। आज हाल ये है कि चीन दुनिया के 181 देशों के साथ व्यापार करता है, इनमें से 150 देश चीन के साथ व्यापार के घाटे में हैं। 43 देश ऐसे हैं  जिनका चीन के साथ व्यापार घाटा 5 परसेंट से ज़्यादा है। भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपियन यूनियन और मेक्सिको जैसी बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाएं  चीन के साथ व्यापार घाटे में हैं। इसीलिए टैरिफ युद्ध पर आज के हालात के लिए जितना चीन जिम्मेदार है, उतने ही जिम्मेदार अमेरिका और यूरोप के मुल्क भी हैं जिन्होंने उस समय चीन को मनमानी करने दी।

मुद्रा लोन: मोदी की मौन क्रांति

सवाल ये है कि चीन ने दादागिरी करके चौबीस साल में दुनिया भर के मार्केट पर कब्जा किया। वो एक-दो दिन में या दो-चार महीने में तो खत्म नहीं हो सकता। ऐसी परिस्थिति में भारत जैसे देश क्या करें? तो इसका जवाब दिया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने। मोदी ने मंगलवार को मुद्र लोन के लाभार्थियों से बात करते हुए कहा कि स्वदेशी और आत्मनिर्भर बनना ही एकमात्र रास्ता है, हमें अपने नौजवानों को न्यापार-केंद्रित बनाना होगा, उद्योगों को विकसित बनाना होगा, इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा,  मुद्रा योजना इसी सोच का नतीजा है। मोदी ने 2015 में मुद्रा योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत अपना कारोबार शुरू करने वाले लोगों को सरकार बिना किसी गारंटी के बिना ब्याज के कर्ज़ देती है। अब तक 33 लाख करोड़ रुपये कर्ज़ दिए जा चुके हैं। मोदी ने कहा कि लोग तो आरोप लगाते हैं कि अमीरों की सरकार है लेकिन 33 लाख करोड़ रुपये तो आम लोगों की जेब में गए और इन लोगों ने इस पैसे पर मौज नहीं की, इसे व्यापार में लगाया, रोजगार पैदा हुए और कर्ज़ भी वक्त पर वापस किया, ये बड़ी बात है, ये एक मौन क्रांति है।

मैंने वो जमाना देखा है जब गरीब आदमी को बैंक से कर्ज़ मिलना असंभव था। गरीब का तो बैंक खाता भी नहीं होता था, वो छोटा-मोटा काम करने के लिए बाजार से ब्याज पर पैसा उठाता था और जीवन भर उसे लौटा नहीं पाता था। इसीलिए बैंक खाता खोलना, मुद्रा लोन देना, एक क्रांति से कम नहीं है। किसी गरीब को बिना किसी गारंटी के, प्रॉपर्टी और गहने गिरवी रखे बगैर 20 लाख रुपये तक ब्याजमुक्त कर्ज़ मिल जाए तो वो अपनी जिंदगी बदल सकता है और देश के आर्थिक विकास में भागीदार बन सकता है। इसके बहुत सारे सबूत और उदाहरण हमने देखे हैं। ये चुपचाप होने वाले एक बड़े बदलाव की तैयारी है जिसमें गरीब का भला होगा, देश का भला होगा, हम अपने प्रोडक्ट्स बनाएंगे, इंपोर्ट पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और जो पैसा बचेगा वो देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने में लगेगा। यही चीन की चालों का जबाव है। यही स्वदेशी क्रांति है। मोदी ने यही संदेश दिया।

महुआ मोइत्रा को गुस्सा क्यों आता है?

तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी, कीर्ति आज़ाद और महुआ मोइत्रा के झगड़े का वीडियो सामने आया। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के लिए बने व्हाट्सएप ग्रुप के चैट लीक हो गए। जो वीडियो और चैट सामने आया है, वो 4 अप्रैल का है। ममता बनर्जी की पार्टी के सांसदों का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलने गया था। उसी दौरान महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी के बीच ऊंची आवाज़ में तू-तू-मैं-मैं हो गई। महुआ मोइत्रा ने चुनाव आयोग के दफ्तर में तैनात BSF के जवानों को बुलाकर कल्याण बनर्जी को गिरफ्तार कराने की धमकी दी। एक वीडियो में कल्याण बनर्जी बेहद भड़के हुए दिखाई दे रहे हैं और वहां मौजूद पार्टी के दूसरे सांसद उन्हें शांत कराने की कोशिश कर रहे हैं। कल्याण बनर्जी ये कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि कोई उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी दे रहा है, दूसरे नेता कहते हैं कि वो धीरे बोलें वरना बात मीडिया में चली जाएगी, जवाब में कल्याण बनर्जी कह रहे हैं कि अगर मीडिया को पता चलता है तो चले, दुनिया के सामने उसकी सच्चाई आनी चाहिए।

दूसरे वीडियो में भी कल्याण बनर्जी जोर-जोर से चिल्ला रहे हैं, वो कह रहे है कि वो पार्टी को किसी प्राइवेट एजेंसी की तरह नहीं चलने देंगे,  गुटबंदी बर्दाश्त नहीं करेंगे। तीसरा वीडियो चुनाव आयोग के वेटिंग रूम का है। इसमें कल्याण बनर्जी सोफे पर बैठे हुए हैं, एक महिला सांसद उन्हें समझाने की कोशिश कर रही हैं कि वो शांत हो जाएं। इस वीडियो में डेरेक ओ ब्रायन भी दिख रहे हैं, वो भी कल्याण बनर्जी को समझा रहे हैं, लेकिन कल्याण बनर्जी गुस्से में महुआ मोइत्रा से कह रहे हैं कि उनसे न उलझें, उन्होंने झगड़ा शुरू किया है, अब झगड़े को खत्म वो करेंगे। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के व्हाट्सएप ग्रुप की चैट भी सामने आ गई। इस चैट में कल्याण बनर्जी महुआ मोइत्रा को इंटरनेशनल ग्रेट लेडी कह रहे हैं, आज वही लेडी उन्हें बीएसएफ से गिरफ्तार कहने के लिए कह रही है।

इसी चैट के अगले हिस्से में कीर्ति आजाद बनर्जी से शांत रहने को कह रहे हैं जिसके जवाब में कल्याण बनर्जी ने कीर्ति आजाद को भी लपेट दिया। कहा कि बीजेपी से उन्हें अंदरुनी राजनीति करने की वजह से निकाला गया और अब तृणमूल कांग्रेस में भी वो वही कर रहे हैं। जैसे ही वीडियो और व्हाट्सएप चैट सामने आई तो तृणमूल कांग्रेस के नेता भी खुल कर मैदान में आ गए। कल्याण बनर्जी ने कहा कि ये सही है कि महुआ के साथ नोंकझोंक हुई थी, महुआ इस बात से नाराज थी कि चुनाव आयोग को दिए गये ज्ञापन पर उनके दस्तखत नहीं कराए गए थे जबकि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं था। कल्याण बनर्जी ने कहा कि उन्होंने वही किया था जो डेरेक ओ ब्रायन ने उन्हें कहा था। कल्य़ाण बनर्जी ने कहा कि जब महुआ मोइत्रा उन पर चिल्लाने लगीं, तो उन्हें गुस्सा आया। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय महुआ मोइत्रा के समर्थन में सामने आ गए। सौगत राय ने कहा कि कल्याण बनर्जी का आचरण बहुत खराब है, वो हर किसी से झगड़ते हैं। सौगत राय ने कहा कि वो ममता बनर्जी से बात करेंगे और कल्याण बनर्जी को लोकसभा में पार्टी के चीफ व्हिप के पद से हटाने की मांग करेंगे।

कल्याण बनर्जी ने तुरंत पलटवार किया। कल्याण बनर्जी ने कहा कि सौगत राय ने नारदा घोटाले में पैसा खाया है, पार्टी की छवि खराब की है, वो दूसरों को ज्ञान न दें तो बेहतर होगा। पता चला है कि डेरेक ओ ब्रायन ने ममता बनर्जी को घटना के बारे में ब्रीफ किया है। ममता ने महुआ मोइत्रा को राज्यसभा की एक महिला सांसद के जरिए निलम्बन और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। ममता का संदेश मिलने के बाद महुआ मोइत्रा ने पार्टी का व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ दिया, ममता और अभिषेक बनर्जी को चिट्ठी लिखकर अपना पक्ष रखा। ये बात सही है कि महुआ मोइत्रा ज्यादातर झगड़ों के लिए चर्चा में रहती हैं और कल्याण बनर्जी की ये बात सही है कि संसद में वो ज्यादातर अडानी के बारे में ही बोलती हैं और पार्टी के अनुशासन से दूर रहती हैं। इससे पहले वो बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे के साथ अपनी तकरार के लिए खबरों में आईं थीं। उस समय ममता ने महुआ का साथ दिया था लेकिन अब उन्होंने अपनी ही पार्टी के सीनियर नेता को पुलिस से पकड़वाने की धमकी दी। इसे बर्दाश्त करना ममता बनर्जी के लिए भी मुश्किल होगा। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 08 अप्रैल, 2025 का पूरा एपिसोड

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