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Rajat Sharma's Blog | पीयूष गोयल ने भारत के स्टार्टअप्स को कैसे आइना दिखाया?

मुझे लगता है पीयूष गोयल ने जो कहा, वो सच कहा। उन्होंने स्टार्टअप चलाने वालों को सिर्फ आईना दिखाया, नौजवानों को प्रोत्साहित करने के लिए कड़वी बात कही। उनकी बात को इसी भावना से लेना चाहिए।

Written By: Rajat Sharma @RajatSharmaLive
Published : Apr 05, 2025 04:01 pm IST, Updated : Apr 05, 2025 04:01 pm IST
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Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हमारे स्टार्टअप्स को चैलेंज दिया, भविष्य का रास्ता बताया। देश में चल रहे स्टार्टअप्स को आईना दिखाया। पीयूष गोयल ने कहा कि हमारे देश में जिस तेजी से स्टार्टअप्स की तादाद बढ़ रही है,वो दिल को खुश करने के लिए अच्छा है, लेकिन जिस तरह के स्टार्टअप्स सामने आ रहे हैं, वो चिंता की बात है।  गोयल ने कहा कि हमारे देश में स्टार्टअप का मतलब बिजनेस हो गया है, कोई फैंसी आइसक्रीम बना  रहा है, कोई ग्लूटेन फ्री बिस्किट का स्टार्ट-अप चला रहा है, तो कोई क्विक डिलीवरी ऐप बनाकर खुश हैं। गोयल ने सवाल उठाया कि क्या इस तरह के स्टार्टअप्स से देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर को फायदा होगा, अर्थव्यवस्था को फायदा होगा।  गोयल ने चीन के स्टार्टअप्स का उदाहरण दिया। कहा कि हम क्विक डिलीवरी ऐप बना रहे हैं और चीन के लोग माइक्रोचिप और सेमीकंडक्टर बना रहे हैं, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के टूल डेवेलप कर रहे हैं, हम लोगों के घरों में खाना और दूसरा सामान पहुंचाकर खुश हैं जबकि चीन के लोग दूसरे देशों को माइक्रोचिप और इलेक्ट्रिक कार बैटरीज सप्लाई कर रहे हैं। मुझे लगता है पीयूष गोयल की बात में वजन है। इस तरह के स्टार्टअप 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लक्ष्य को पाने में मददगार साबित नहीं होंगे। ये मसला गंभीर है और देश के भविष्य से जुड़ा है।

गोयल के भाषण के बाद क्विक कॉमर्स स्टार्ट अप ज़ेप्टो के फाउंडर आदित पलीचा, भारत-पे के फाउंडर अशनीर ग्रोवर, इन्फोसिस के बोर्ड मेंबर मोहनदास पाई ने बयान पर ऐतराज़ जताया। आदित पलीचा ने ट्विटर पर लंबी चौड़ी पोस्ट लिखी और कहा कि भारत के स्टार्ट-अप की आलोचना करना  बहुत आसान है, लेकिन कोई ये नहीं देखता कि चीन और अमेरिका की स्टार्ट-अप अगर कमाल कर रही हैं, तो वहां का माहौल क्या है। आदित ने कहा कि zepto ने पिछले तीन-चार साल में डेढ़ लाख लोगों को रोज़गार दिया, और सरकार को एक हज़ार करोड़ से ज़्यादा का टैक्स अदा करता है। जब स्टार्टअप्स के लोग ऐतराज़ करने लगे तो पीयूष गोयल फिर स्टार्टअप महाकुंभ में गए और कहा कि सरकार तो चाहती है कि भारत के स्टार्टअप्स दुनिया में सबसे बड़े बनें,सबसे बेहतरीन काम करें, लेकिन सिर्फ बोलने से नहीं होगा, कुछ नया करके दिखाना होगा। गोयल ने कहा कि उनका सुझाव है कि अब रिसर्च पर फोकस किया जाए, तभी हम भविष्य की चुनौतियों का मुक़ाबला कर पाएंगे।

मुझे लगता है पीयूष गोयल ने जो कहा, वो सच कहा। उन्होंने स्टार्टअप चलाने वालों को सिर्फ आईना दिखाया, नौजवानों को प्रोत्साहित करने के लिए कड़वी बात कही। उनकी बात को इसी भावना से लेना चाहिए। देश में अब तक पौने दो लाख स्टार्टअप हैं। स्टार्टअप्स रोजगार तो दे रहे हैं, चाहे फूड डिलवरी ऐप हों, सर्विसेज के एप हों, या मार्केटिंग के दूसरे ऐप, इनसे कम पढ़े लिखे गरीब और मध्यम वर्ग के नौजवानों को काम तो मिल रहा है। ये अच्छी बात है। ये इसका सकारात्मक पक्ष है। पर इस तरह के start up सिर्फ डिलीवरी boys पैदा कर रहे हैं। इससे देश की अर्थव्यवस्था, देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर, हमारे निर्यात को कोई फायदा नहीं हो रहा। इसीलिए पीयूष गोयल की चिंता जायज़ है क्योंकि सरकार स्टार्टअप्स को खुल कर मदद दे रही है। भारत सरकार ने 2500 करोड़ रुपये स्टार्टअप के लिए रखे, स्टार्टअप शुरू करने के लिए सस्ता कर्ज़ सरकार देती है, इसके लिए पांच सौ करोड़ का बजट रखा है। शुरू के तीन सालों में स्टार्टअप को जो भी मुनाफा होगा, उसे टैक्स फ्री रखा है, स्टार्टअप पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा।

जो बड़ी  कंपनियां स्टार्टअप को कर्ज़ देती है, उस पर कंपनियों को टैक्स में छूट मिलती है। इतनी सहूलियत देने के बाद भी अगर हम सिर्फ डिलिवरी एप बनाकर खुश रहें, तो चिंता की बात तो है। अब ज़माना बदल गया है। नए डिलीवरी एप अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी giants का मुकाबला तो नहीं कर सकते और जब तक हमारे देश के स्टार्टअप्स इस लायक बनेंगे, तब तक मार्केट में बहुत कुछ नया आ चुका होगा। इसीलिए भविष्य की तरफ देखने की जरूरत है। दो कदम आगे की सोचने की जरूरत है। इसीलिए पीयूष गोयल ने चीन का उदाहरण दिया। चीन ने आज से दस साल पहले सेमीकंडक्टर, माइक्रोचिप और AI पर काम शुरू किया। आज उसे इसका फायदा मिल रहा है। अगर हमारे Start Ups ने इसके बारे में सोचा होता तो आज भारत को इसका फायदा मिलता। अब अमेरिका ने चीन पर टैरिफ लगा दिया है। अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार में हमारे लिए जगह बनी है, लेकिन हमारे पास न तो प्रोडक्ट हैं, न इन्फ्रास्ट्रक्चर। तो ये मौका हमारे हाथ से निकल जाएगा। इसका फायदा ताइवान और साउथ कोरिया जैसे देश उठाएंगे।

ट्रम्प का टैरिफ: भारत चुनौती का सामना  कैसे करे?

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जो टैरिफ युद्ध शुरू किया है, उसका असर दुनिया भर में दिखने लगा है। अमेरिका के शेयर बाजार समेत भारत से लेकर जापान, चीन, वियतनाम।,ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और यूरोपीय देशों तक के शेयर बाज़ार में भारी गिरावट हुई। इन्वेस्टर्स ने शेयर मार्केट से पैसा निकालना शुरू कर दिया। हमारे यहां निवेशकों  के क़रीब 10 लाख करोड़ रुपए शेयर बाज़ार में डूब गए। भारत के नजरिए से देखें तो ट्रंप के टैरिफ का कई सेक्टर्स में हमें फायदा हो सकता है।  कपड़ा और garment export बढ़ाया जा सकता है। इसमें हम बांग्लादेश और वियतनाम से आगे निकल सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम में हम वियतनाम और थाईलैंड को पीछे छोड़ सकते हैं। भारत का सबसे बड़ा निर्यात दवाओं का है, जो अभी टैरिफ फ्री है। हालांकि ये मानकर नहीं बैठ जाना चाहिए कि ट्रंप ने टैरिफ में जो बदलाव किए हैं ये उनकी आखिरी चाल है। अभी बहुत सारी चुनौतियां आनी बाकी हैं।

हमारा पुराना अनुभव बताता है कि अमेरिका भारत से कृषि में सुधार लाने को कहेगा। MSP सिस्टम में सुधार के लिए कहेगा, जो हमें मानने की कोई जरूरत नहीं। अमेरिका हमसे Patent Act में बदलाव के लिए कहेगा ताकि उसकी old time drugs को प्रोटेक्शन मिल सके। अमेरिका हमसे Amazon और Wallmart जैसी कंपनियों के लिए रियायतें मांगेगा। उन्हें भारतीय ग्राहकों को सीधे माल बेचने की सुविधा देने के लिए कहेगा, लेकिन हमें इन सब की परवाह किए बगैर अपनी मैन्युफैक्चरिंग, अपने मार्केट और अपने निर्यात पर फोकस करना चाहिए। अगर ट्रंप का नारा है America First तो नरेंद्र मोदी का नारा भी है India First। ट्रंप के टैरिफ से दुनिया में जो संकट पैदा हुआ है, उसे हम अवसर  में बदल सकते हैं। अपने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को जबरदस्त फायदा पहुंचा सकते हैं। Make in India को रफ्तार दे सकते हैं। अगर हम इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर पाएं, labour laws में  सुधार कर पाएं, बिजनेस बढ़ाने के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर कर पाएं, और सबसे बड़ी बात, बिजनेस करने वालों को लेकर अपनी सोच बदल पाएं, ये सोचना बंद करें कि हर बिजनेस करने वाला बेईमान होता है, ये देखें कि वो कितनी नौकरियां देता है, कितना इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करता है तो इस टैरिफ युद्ध को बड़े अवसर में बदल सकते हैं। अगर दुनिया में अपनी जगह बनानी है तो बिजनेसमैन की तरह सोचना होगा, बिजनेस करने वालों को सम्मान देना होगा। दूसरा कोई रास्ता नहीं है।

वक्फ बिल: विरोध सियासी, आशंकाएं बेकार

वक्फ बिल संसद में पास होने के कुछ ही घंटे बाद देश के कई शहरों में नमाज के बाद प्रदर्शन हुए। कोलकाता, मुंबई, अहमदाबाद, बैंगलुरू, पटना, किशनगंज, जमुई, अलीगढ़, कानपुर और मेरठ जैसे कई शहरों में  प्रदर्शन हुए। सबसे ज्यादा हंगामा और सबसे तीखी तकरीरें कोलकाता में हुई। मुस्लिम संगठनों की रणनीति साफ है। अब तमाम मौलाना देश भर में प्रोटेस्ट शुरू करेंगे, धरने देंगे। वक्फ बिल पर लोकसभा में 14 घंटे और राज्यसभा में 13 घंटे बहस हुई। सभी पार्टियों के नेताओं को अपने तर्क पेश करने का मौका मिला लेकिन विपक्ष के ज्यादातर नेताओं ने सिर्फ सियासी डायलॉगबाजी की। सबके सब यही कहते रहे कि वक्फ बिल मुसलमानों और संविधान के खिलाफ है, सरकार वक्फ की प्रॉपर्टी हड़पना चाहती है, लेकिन किसी ने ये नहीं बताया कि ये बिल संविधान के किस आर्टिकल का उल्लंघन है। खैर इस तरह के आरोप उस वक्त भी लगाए गए थे, जब आर्टिकिल 370 को हटाया गया था। वो मामला भी सुप्रीम कोर्ट गया था। कोर्ट ने उसका फैसला कर दिया। अब वक्फ बिल पर भी फैसला करेगा। लेकिन इस मुद्दे पर जबरदस्त सियासत हो रही है, होती रहेगी। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 04 अप्रैल, 2025 का पूरा एपिसोड

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