Friday, February 27, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. हेल्थ
  3. ग्लूकोमा क्या है और इसे आंखों का 'साइलेंट किलर' क्यों कहा जाता है? बता रहे हैं एक्सपर्ट

ग्लूकोमा क्या है और इसे आंखों का 'साइलेंट किलर' क्यों कहा जाता है? बता रहे हैं एक्सपर्ट

Written By: Poonam Yadav @R154Poonam Published : Jan 06, 2026 07:35 pm IST, Updated : Jan 06, 2026 07:38 pm IST

Symptoms of Glaucoma: आंख से जुड़ी बीमारी ग्लूकोमा होने पर आंखों की रोशनी भी जा सकती है।चलिए जानते हैं इसके लक्षण क्या है और बचाव के लिए क्या करें?

 ग्लूकोमा - India TV Hindi
Image Source : FREEPIK ग्लूकोमा

ग्लूकोमा आंख से जुड़ी ऐसी समस्या है जिसमें आंख की रोशनी कम होने लगती है। ग्वालियर स्थित रतन ज्योति नेत्रालय के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. पुरेंद्र भसीन, कहते हैं कि ग्लूकोमा में आंख के भीतर दबाव बढ़ने के कारण ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है। ऑप्टिक नर्व आंखों से दिमाग तक देखने की जानकारी पहुंचाने का काम करती है। जब यह नर्व धीरे-धीरे खराब होने लगती है, तो नजर पर असर पड़ता है। अगर समय रहते इलाज न किया जाए, तो ग्लूकोमा स्थायी अंधेपन का कारण भी बन सकता है।

ग्लूकोमा को क्यों कहते हैं आंखों का साइलेंट किलर?

ग्लूकोमा को आंखों का साइलेंट किलर इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर नजर नहीं आते। ज्यादातर मामलों में व्यक्ति को तब तक कोई परेशानी महसूस नहीं होती, जब तक बीमारी काफी आगे न बढ़ जाए। धीरे-धीरे देखने का दायरा कम होने लगता है, लेकिन यह बदलाव इतना धीमा होता है कि मरीज को इसका अहसास नहीं हो पाता।

शुरू में नहीं होती ज़्यादा परेशानी:

इस बीमारी में सबसे पहले साइड से देखने की क्षमता प्रभावित होती है। शुरुआत में सीधा देखने में कोई दिक्कत नहीं होती, इसलिए लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। समय के साथ यह समस्या बढ़ती जाती है और अंत में केंद्र की दृष्टि भी प्रभावित हो सकती है। एक बार ऑप्टिक नर्व को हुआ नुकसान ठीक नहीं किया जा सकता, इसलिए शुरुआती पहचान बेहद जरूरी है।

ग्लूकोमा होने का सबसे ज्यादा खतरा किसे है?

ग्लूकोमा किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 40 साल से अधिक उम्र के लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है। इसके अलावा 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में ग्लूकोमा होने की संभावना छह गुना अधिक होती है। जिन लोगों के परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास रहा हो, जिन्हें डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो, या जो लंबे समय तक स्टेरॉइड दवाओं का इस्तेमाल करते हैं, उनमें इसका जोखिम बढ़ सकता है।

ग्लूकोमा से बचाव का तरीका?

ग्लूकोमा से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका नियमित आंखों की जांच है। आंखों के दबाव की जांच, ऑप्टिक नर्व का परीक्षण और दृष्टि क्षेत्र की जांच से इस बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ा जा सकता है। ग्लूकोमा अवेयरनेस मंथ का उद्देश्य भी लोगों को यह समझाना है कि आंखों की नियमित जांच कितनी जरूरी है, ताकि समय रहते इलाज शुरू किया जा सके और नजर को बचाया जा सके।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

Latest Health News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। हेल्थ से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।

Advertisement
Advertisement
Advertisement