Holika Dahan Parikrama: हिंदू धर्म में होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होली से एक रात पहले होलिका दहन किया जाता है। इस अग्नि को पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। होलिका की अग्नि की परिक्रमा लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि होलिका की परिक्रमा 1, 3 या 7 बार करनी चाहिए? तो आइए जानते हैं शास्त्रों में होलिका की अग्नि की परिक्रमा करने का क्या आधार बताया गया है और परिक्रमा लगाने की सही विधि क्या है।
होलिका दहन का धार्मिक महत्व
होलिका दहन की परंपरा भक्त प्रह्लाद की कथा से जुड़ी मानी जाती है, जिसमें अग्नि के माध्यम से बुराई का अंत और भक्ति की विजय का संदेश मिलता है। इस अग्नि को नकारात्मक शक्तियों को नष्ट करने वाली माना जाता है। बड़े-बुजुर्गों के अनुसार, अग्नि की परिक्रमा करना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगने का माध्यम भी है।
1, 3 या 7 परिक्रमा का धार्मिक आधार
शास्त्रों में होलिका की 3 या 7 परिक्रमा को शुभ बताया गया है। तीन परिक्रमा त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश के सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। वहीं सात परिक्रमा जीवन के सात चक्रों और सात वचनों की शुद्धि का संकेत देती है। कुछ लोग एक परिक्रमा भी करते हैं, जिसे श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है, लेकिन पारंपरिक रूप से 3 या 7 परिक्रमा अधिक प्रचलित हैं। संख्या से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता मानी गई है।
वैज्ञानिक और आध्यात्मिक वजह
होलिका दहन के समय अग्नि तेज जलती है, जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध होता है। माना जाता है कि अग्नि की गर्मी वातावरण में मौजूद हानिकारक तत्वों को कम करने में सहायक होती है। वहीं, आध्यात्मिक दृष्टि से होलिका की परिक्रमा करने का अर्थ है ईश्वर को जीवन का केंद्र मानना। अग्नि के चारों ओर घूमना इस बात का प्रतीक है कि हम अपने जीवन की नकारात्मकता को त्यागकर सकारात्मक ऊर्जा को अपनाना चाहते हैं। इससे मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि होती है।
होलिका परिक्रमा लगाने की सही विधि
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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