Wednesday, January 07, 2026
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सावधान! डायबिटीज को कंट्रोल करने वाली ये दवा ही बढ़ा रही है यह बीमारी, नई रिसर्च में हुआ खुलासा

टाइप 2 डायबिटीज में सल्फोनिल्यूरिया कैटेगरी की दवाओं का सालों से इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन हाल ही में हुई एक स्टडी में यह बताया गया है कि यह दवाएं डायबिटीज के मरीजों के लिए खतरनाक हो सकती हैं।

Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
Published : Jan 06, 2026 11:32 pm IST, Updated : Jan 06, 2026 11:32 pm IST
डायबिटीज - India TV Hindi
Image Source : FREEPIK डायबिटीज

डायबिटीज (मधुमेह) दुनिया भर में तेज़ी से बढ़ रही है और भारत को 'डायबिटीज की राजधानी' कहा जाता है। यहाँ पिछले कुछ सालों में डायबिटीज के मरीजों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। हमारी बदलती जीवनशैली, आनुवंशिकी और खराब खानपान इसके मुख्य कारण है। इस बीमारी को कंट्रोल करने के लिए मरीज अच्छी डाइट के साथ दवाइयां भी लेते हैं। लेकिन हाल ही में डायबिटीज की दवाइयों को लेकर एक खबर सामने आई है जो बेहद निराशजनक है। एक नई रिसर्च में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में दशकों से इस्तेमाल की जा रही सल्फोनिल्यूरिया (Sulphonylureas) कैटेगरी की दवाएं इस बीमारी को और भी बढ़ा सकती हैं। यह दवाएं शरीर में इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं की कार्यक्षमता को नुकसान पहुंचाती हैं।

क्या कहती है स्टडी?

स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ बार्सिलोना, के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि सल्फोनिल्यूरिया कैटेगरी की दवाएं जैसे ग्लिबेनक्लामाइड जो सालों से डायबिटीज के मरीजों को दी जा रही हैं। ये दवाएं बीटा कोशिकाओं को अधिक इंसुलिन रिलीज के लिए स्टिम्युलेट करती हैं। इसका मतलब यह है कि ये कोशिकाएं जीवित रहते हुए भी इंसुलिन बनाना और छोड़ना ठीक से नहीं निभा पातीं। 

Diabetes, Obesity and Metabolism में पब्लिश हुई रिसर्च के मुताबिक, प्रोफेसर एडुआर्ड मोंटान्या के नेतृत्व में किए गए शोध में विशेष रूप से 'ग्लाइबेनक्लामाइड' नामक दवा का अध्ययन किया गया। यह डायबिटीज के मरीजों को दी जाने वाली एक कॉमन दवा है। दवा को लेकर रिसर्च यह बताता है कि जब बीटा कोशिकाएं लंबे समय तक तक ऐसी दवा के संपर्क में रहती हैं तो हमारी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। इस दवा से जीनों की एक्टिविटी कम होने लगती है जो इंसुलिन प्रोडक्शन के लिए जरूरी होते हैं। यह प्रभाव समय के साथ और अधिक गंभीर होता है।

कब से किया जा रह है सल्फोनिल्यूरिया दवाओं का इस्तेमाल?

सल्फोनाइलयूरिया कैटेगरी दवाओं का उपयोग 1950 के दशक से किया जा रहा है। सल्फोनिल्यूरिया टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं का एक वर्ग है, जो अग्न्याशय को अधिक इंसुलिन बनाने और छोड़ने के लिए स्टिम्युलेट करती है, जिससे रक्त शर्करा का स्तर कम होता है। इनमें ग्लिमेपिराइड, ग्लिपिज़ाइड और ग्लाइब्यूराइड जैसी दवाएं शामिल हैं, जो आज भी टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में व्यापक रूप से दी जाती हैं। ये दवाएं शुरुआत में ब्लड शुगर को कम करने में प्रभावी होती हैं, लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल से इनका असर कम होने लगता है और साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ जाता है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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