कांग्रेस-मुक्त भारत का नारा लगाने वाली भाजपा ने ठाणे में अंबरनाथ नगर परिषद में सीधे कांग्रेस से हाथ मिला लिया है। मुंबई से महज 70 किलोमीटर दूर स्थित अंबरनाथ नगर परिषद में शिंदे सेना को सत्ता से दूर रखने के लिए बीजेपी ने कांग्रेस से हाथ मिलाया है। भाजपा-कांग्रेस के इस गठबंधन से राजनीति गरमा गई है और राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है।
शिवसेना ने क्या कहा?
इस गठबंधन को "अम्बरनाथ विकास अघाड़ी" नाम दिया गया है। हालांकि, इन घटनाक्रमों से शिवसेना शिंदे समूह में भारी असंतोष है। बीजेपी-कांग्रेस में हुए गठबंधन के बाद शिंदे सेना आगबबूला हो गई है। शिवसेना शिंदे समूह ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए इस गठबंधन को "अभद्र युति (गठबंधन)" बताया है। शिंदे समूह के विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने कांग्रेस-मुक्त भारत की बात करने वाली भाजपा पर कांग्रेस के साथ गठबंधन करके शिवसेना पर हमला करने का आरोप लगाया है।
समझें पूरा घटनाक्रम
अंबरनाथ शिंदे सेना का गढ़ माना जाता है, एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे यहां से सांसद है। हाल ही में अंबरनाथ नगरपरिषद का चुनाव हुए थे। इस नगर परिषद चुनाव में बीजेपी ने शिंदे सेना को मात दी। यहां बीजेपी का नगराध्यक्ष चुनकर आया। इस चुनाव में शिंदे सेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन बहुमत से थोडा दूर रह गई। शिंदे सेना सोच रही थी की बीजेपी उनके साथ मिलकर नगर परिषद में सरकार बनाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीजेपी ने शिंदे सेना के बजाय कांग्रेस से हाथ मिला लिया और नगर परिषद में सत्ता स्थापित कर ली। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता स्थापित करना का फैसला लिया गया।
श्रीकांत शिंदे का आया बयान
अंबरनाथ में हुए राजनीतिक घटनाक्रम पर सांसद श्रीकांत शिंदे का बयान सामने आया है। अंबरनाथ में BJP और कांग्रेस के गठबंधन पर श्रीकांत शिंदे ने कहा- "यह सवाल पूरी तरह से हमारी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी के लिए है। BJP नेता इसका जवाब अच्छे से दे पाएंगे। कई सालों से, BJP और शिवसेना केंद्र, राज्य और नगर निगम में गठबंधन में हैं। यह गठबंधन अटूट रहना चाहिए। अंबरनाथ में शिवसेना सत्ता में थी और शिवसेना ने अंबरनाथ में अच्छा विकास कार्य किया। अब, वे जो भी फैसला लेना चाहते हैं, शिवसेना विकास की राजनीति करने वाले के साथ होगी।"
अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव नतीजे
कुल सीट - 60
- बीजेपी - 14
- शिवसेना - 27
- कांग्रेस - 12
- एनसीपी - 4
- निर्दलीय - 2
भाजपा ने क्या सफाई दी?
भाजपा और कांग्रेस के इस गठबंधन को शिवसेना ने पीठ में छुरा घोंपने जैसा बताया है। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। भाजपा उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने शिंदे समूह पर पलटवार करते हुए कहा है कि अगर वे पिछले पच्चीस वर्षों से भ्रष्टाचार में लिप्त शिंदे समूह के साथ सत्ता में होते तो यह एक बेहद ही अनुचित गठबंधन न होता। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने अंबरनाथ नगर परिषद के लिए शिंदे समूह के साथ महागठबंधन पर कई बार चर्चा करने की कोशिश की, लेकिन उनके नेताओं से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
एक ओर जहां भाजपा-कांग्रेस गठबंधन अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता के बंटवारे को स्पष्ट कर रहा है। वहीं, दूसरी ओर इस गठबंधन ने महागठबंधन में तनाव पैदा कर दिया है। अंबरनाथ में यह गठबंधन अनुचित है या अपरिहार्य, इस पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप आने वाले समय में और भी तेज होने की संभावना है।
CM फडणवीस क्या बोले?
अंबरनाथ में हुए राजनीतिक घटनाक्रम पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन मंजूर नहीं है। अंबरनाथ में लोकल लेवल पर जो फैसला किया है उसे दुरुस्त किया जाएगा और कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं होगा।
कांग्रेस भी पीछे हटी
इधर महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इस घटनाक्रम पर नेताओं को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा- "अगर किसी भी लोकल नेता भी बीजेपी के साथ कोई भी गठबन्धन किया तो कांग्रेस उस नेता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी..किसी भी कीमत पर कांग्रेस, बीजेपी के साथ चुनाव नहीं लड़ेगी, चाहे वो कोई भी चुनाव हो।"
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