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कर्नाटक में सरकारी ठेकों में मुसलमानों को 4 प्रतिशत आरक्षण पर RSS का पहला बयान, जानें क्या बोले दत्तात्रेय होसबाले

 Published : Mar 23, 2025 07:46 pm IST,  Updated : Mar 23, 2025 07:46 pm IST

‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा’ की तीन दिवसीय बैठक के समापन के अवसर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि संविधान धर्म आधारित कोटे की इजाजत नहीं देता।

Dattatreya Hosbale- India TV Hindi
दत्तात्रेय होसबाले Image Source : FILE

बेंगलुरु:  कर्नाटक सरकार द्वारा सरकारी ठेकों में मुसलमानों को चार प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले पर जारी बहस के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का बयान सामने आया है। उन्होंने रविवार को कहा कि संविधान धर्म आधारित कोटे की इजाजत नहीं देता। इस तरह का आरक्षण बी आर आंबेडकर द्वारा लिखित संविधान के खिलाफ है। 

अदालतों ने ऐसे आरक्षण के प्रावधानों को खारिज किया है

संघ (RSS) की सर्वोच्च निर्णायक संस्था ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा’ की तीन दिवसीय बैठक के समापन के अवसर पर बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में होसबाले ने कहा, ‘‘बाबा साहेब आंबेडकर द्वारा लिखित संविधान में धर्म आधारित आरक्षण को स्वीकार नहीं किया गया है। ऐसा करने वाला कोई भी व्यक्ति हमारे संविधान निर्माता के खिलाफ जा रहा है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में अविभाजित आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र की ओर से किए गए मुसलमानों के लिए धर्म-आधारित आरक्षण लागू करने के प्रयासों को उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया था। होसबाले ने इस बात पर जोर दिया कि अदालतों ने ऐसे आरक्षण के प्रावधानों को खारिज किया है। 

‘‘आक्रमणकारी मानसिकता’’ वाले भारत के लिए खतरा

महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को लेकर उठे विवाद के बारे में पूछे गए सवाल पर संघ नेता ने कहा कि औरंगजेब का महिमामंडन किया गया, उसके भाई दारा शिकोह का नहीं जो कि सामाजिक सद्भाव में विश्वास करने वाला व्यक्ति था। होसबाले ने कहा कि भारत के मूल्यों के खिलाफ जाने वाले लोगों को आदर्श बनाया गया। उन्होंने मुगल बादशाह अकबर का विरोध करने के लिए राजपूत राजा महाराणा प्रताप जैसी शख्सियतों की सराहना की और कहा कि जिन्होंने आक्रमणकारियों का प्रतिरोध किया, वे भी ‘स्वतंत्रता सेनानी’ थे। आरएसएस नेता ने दावा किया कि ‘‘आक्रमणकारी मानसिकता’’ वाले लोग भारत के लिए खतरा पैदा करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमें उन लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए जो भारतीय मूल्यों का समर्थन करते हैं।’’ 

सुचारू रूप से चल रहा है सब कुछ 

यह पूछे जाने पर कि क्या आरएसएस का मानना ​​है कि उसे कुछ मामलों पर केंद्र को अपने विचार बताने चाहिए, होसबाले ने कहा कि इसकी कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा है। आरएसएस के सरकार्यवाह ने कहा, ‘‘संघ सरकार को दिन-प्रतिदिन किए जाने वाले कामों के बारे में नहीं बताता है, लेकिन जब भी लोग कुछ मुद्दे उठाते हैं, तो विभिन्न संगठनों के विविध क्षेत्रों में काम करने वाले आरएसएस कार्यकर्ता अपना संदेश पहुंचाते हैं। हमारे पास एक तंत्र है जहां ऐसी चीजों पर चर्चा की जाती है।’’ 

राम मंदिर पूरे हिंदू समाज की उपलब्धि

यह पूछे जाने पर कि क्या आरएसएस अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को अपनी उपलब्धि मानता है, उन्होंने कहा कि यह मंदिर केवल संघ की ही उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे हिंदू समाज की उपलब्धि है। जातिवाद के उन्मूलन के मुद्दे पर होसबाले ने कहा कि संघ शाखाएं इस मुद्दे को सुलझाने के लिए आदर्श मंच हैं और उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि संघ के स्वयंसेवकों के बीच कई अंतरजातीय विवाह हुए हैं। भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के बारे में पूछे गए सवाल पर आरएसएस नेता ने कहा कि संघ पार्टी के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता है। (भाषा)

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