नई दिल्ली: लोकसभा में ऐतिहासिक मतों के बाद पास होने के बाद महिला आरक्षण बिल राज्यसभा से भी ऐतिहासिक मतों से पास हो गया है। उच्च सदन से पास होनेके बाद अब इस बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। इस बिल पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा। वोटिंग के दौरान पहले चरण में बिल के समर्थन में 171 वोट पड़े। वहीं इस दौरान बिल के खिलाफ एक भी वोट नहीं पड़े। वहीं दूसरे चरण में इस बिल के समर्थन में 215 वोट पड़े और के भी सांसद ने इस बिल का विरोध नहीं किया।
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वहीं इससे पहले राज्यसभा में बिल पर चल रही चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ''इस बिल से देश के लोगों में एक नया विश्वास पैदा होगा। सभी सदस्यों और राजनीतिक दलों ने महिलाओं को सशक्त बनाने और 'नारी शक्ति' को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आइए देश को एक मजबूत संदेश दें।"
बिल पर चर्चा के दौरान जेपी नड्डा और मल्लिकार्जुन खरगे के बीच हुई बहस
वहीं इससे पहले इस बिल पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख जेपी नड्डा और कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच तीखी बहस हो गई। दरअसल जेपी नड्डा ने राज्यसभा में महिला आरक्षण पर कहा कि इसका असर 2029 के चुनाव में देखने को मिलेगा। जेपी नड्डा ने कहा कि यदि आज यह बिल पास किया जाता है तो 2029 में महिलाएं, आरक्षित सीटों पर सांसद बनकर आ जाएंगी। इस पर खरगे ने कहा मैं कबीर का एक दोहा पढ़ता हूं "कल करे सो, आज कर, आज करे सो अब, पल में प्रलय होगी तो कार्य करोगे कब।" खरगे ने कहा कि जब पंचायत, जिला पंचायत एक्ट से महिलाओं को आरक्षण मिला तो फिर केंद्र सरकार द्वारा लाया गया महिला आरक्षण तुरंत लागू क्यों नहीं हो रहा।
राजनीतिक लाभ लेना हमारी नीयत नहीं-नड्डा
जेपी नड्डा ने कहा कि मैं यहां स्पष्ट करना चाहता हूं कि बीजेपी की नियत यहां कोई राजनीतिक लाभ लेना नहीं है। हमारा उद्देश्य महिलाओं का सही मायने में सशक्तीकरण करना है। अगर हमको राजनीतिक लाभ लेना होता तो हम कह देते कि इसे हम अभी कर लेंगे। नड्डा ने कहा कि यही एकमात्र रास्ता है और यही सबसे छोटा रास्ता भी है। इस पर विपक्ष ने 'नो-नो' कहना शुरू कर दिया।