नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) सरकार भ्रष्टाचार-रोधी जन लोकपाल विधेयक दिल्ली विधानसभा में पेश करने से पहले सलाह के लिए इसे केंद्र सरकार के पास भेजना चाहती है। दिल्ली सरकार की इस पहल से केंद्र और राज्य सरकार के बीच अधिकारों को लेकर जारी 'जंग' नरम पड़ने के आसार हैं।
जन लोकपाल विधेयक पर केंद्र की राय मांगे जाने का मतलब है कि इस प्रक्रिया में कुछ देरी लगेगी, जिस कारण अगले महीने शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में इस विधेयक के पेश होने की संभावना कम ही है।
पिछले साल दिल्ली विधानसभा में जन लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाने के कारण मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। इस तरह दिल्ली में पहली बार बनी आप की सरकार 49 दिन ही चल सकी।
दिल्ली में भारी बहुमत से बनी आप की सरकार ने 100 दिनों के भीतर 35 भ्रष्ट अधिकारियों को गिरफ्तार करवाया है और 153 को निलंबित किया है।
केजरीवाल सरकार इस बार ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहती, जिससे पहले की तरह कोई विवाद पैदा हो।
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया, "हम इस बार कोई जल्दबाजी नहीं चाहते। हम विधेयक का मसौदा पहले केंद्र को भेजेंगे। 2014 में पेश किए विधेयक में इस बार कुछ बदलाव किए गए हैं। "
पिछले साल फरवरी में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों ने 'असंवैधानिक' करार देते हुए इस विधेयक को पेश किए जाने का विरोध किया था, क्योंकि यह केंद्र सरकार द्वारा पुनरीक्षित नहीं था।
इस समय आप सरकार और दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग के बीच अफसरों की नियुक्ति और तबादलों के अधिकार को लेकर जंग जारी है। मामला राष्ट्रपति, दिल्ली उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है।
जंग यह कहते हुए पिछले जन लोकपाल विधेयक को विधानसभा में पेश करने का विरोध कर चुके हैं कि ऐसा करना संवैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन है।
एक अन्य अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया, "निर्धारित प्रक्रिया के तहत विधेयक उपराज्यपाल को भेजा जाएगा, वह इसे गृह मंत्रालय को भेजेंगे। गृह मंत्रालय इस पर कानून मंत्रालय की राय मांगेगा।"
अधिकारी ने बताया "अगर गृह मंत्रालय किसी सुधार का सुझाव देगा, तो यह वापस उपराज्यपाल के पास आएगा। इसके बाद जंग इसे लागू करने के लिए सरकार के पास भेजेंगे।"
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली सरकार के जन लोकपाल विधेयक का मसौदा उत्तराखंड सरकार के लोकायुक्त विधेयक की तर्ज पर है।
आप का जन लोकपाल विधेयक मुख्यमंत्री तक पर मुकदमा चलाने का अधिकार देगा और सुनिश्चित करेगा कि मुकदमे का फैसला छह महीनों के हो जाए।
संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि प्रस्तावित विधेयक और 2013 में कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार द्वारा पारित केंद्रीय लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम से भिन्न है। इसी तरह के लोकपाल विधेयक के लिए अन्ना हजारे ने व्यापक आंदोलन किया था।