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ये है जेएंडके की जादुई सीट, यहां जो जीता उसकी ही हिमाचल बनी है सरकार

 Edited By: India TV News Desk
 Published : Nov 10, 2017 07:16 am IST,  Updated : Nov 10, 2017 09:19 am IST

इस बार भी मुकाबला इन्हीं दो चिर प्रतिद्वंद्वियों (भाजपा-कांग्रेस) के बीच है। इस विधानसभा क्षेत्र से तीसरे प्रत्याशी निर्दलीय लोकिंद्र झौहटा हैं। कांग्रेस के लिए यह सीट इस वजह से भी खास है क्योंकि 1985 में यहां से वीरभद्र सिंह विधायक रह चुके हैं हालां

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नई दिल्ली: पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार को मतदान संपन्न हो गया। राज्य की 68 विधानसभा सीटों के लिए बंपर मतदान हुआ। शाम पांच बजे तक 74 प्रतिशत मतदान हुआ है और इसके नतीजे 18 दिसंबर को आएंगे। लेकिन प्रदेश में एक ऐसी सीट है, जहां प्रत्याशी बदलते रहे, लेकिन जो भी पार्टी जीती, उसी कि सरकार बनी। वैसे तो ऐतिहासिक रूप से इस सीट पर अधिकतर बार कांग्रेस को जीत मिलती रही है लेकिन 2007 में भाजपा के नरेंद्र बरागटा ने कांग्रेस के रोहित ठाकुर को लगभग 3000 वोटों से हराकर पहली बार इस सीट पर भाजपा का परचम लहराया था।

हम बात कर रहे हैं शिमला की जुब्बल-कोटखाई सीट की जिसने हर चुनाव में सत्ता का सुख भोगा है। जुब्बल-कोटखाई (जेएंडके) की जनता ने कभी विपक्ष में बैठने के लिए जनादेश दिया ही नहीं। इसी चुनाव क्षेत्र ने प्रदेश को तीन बार मुख्यमंत्री दिए। यहां तक कि 1977 में प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार बनी लेकिन जुब्बल कोटखाई की किस्मत ऐसी थी कि तीन साल बाद बिना चुनाव हुए ही न सिर्फ सत्ता में बैठ गया बल्कि उसके विधायक ठाकुर रामलाल सीएम बन गए।

1990 में भी एक वक्त ऐसा आया कि जुब्बल ने कोटखाई से दो बार मुख्यमंत्री रहे ठाकुर रामलाल कांग्रेस से अलग होकर जनता दल से चुनाव लड़े। जनता दल बहुत ही कम सीटों पर लड़ रहा था तो प्रदेश में तय था कि कांग्रेस या भाजपा की सरकार बनेगी लेकिन यहां से लड़ रहे ठाकुर रामलाल ने न सिर्फ वीरभद्र को चुनाव में पहली बार हराया बल्कि भाजपा के सत्ता में आने पर उसमें शामिल हो गए। उस समय केंद्र में वीपी सिंह की जनता दल सरकार में भाजपा सहयोगी थी। जब प्रदेश में शांता कुमार की सरकार बनी तो जनता दल उनके साथ हो गया।

जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में सत्ता का साथ दिए जाने की परंपरा 1952 से चली आ रही है। प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डा यशवंत सिंह परमार के कार्यकाल से लेकर आज तक यह विधानसभा क्षेत्र विपक्ष में नहीं रहा है। 1952 से लेकर 2012 तक के विधानसभा चुनाव में यह क्षेत्र सिर्फ एक बार ही विपक्ष में रहा। शेष इस क्षेत्र की जनता ने यहां से सत्ता का साथ दिया है।

सत्ता में आज तक बैठे जुब्बल कोटखाई के विधायक

  • 1951 बाला नंद, कांग्रेस
  • 1967 राम लाल, कांग्रेस
  • 1972 रामलाल, कांग्रेस
  • 1977 राम लाल, कांग्रेस
  • 1980 राम लाल, कांग्रेस
  • 1985 वीरभद्र सिंह, कांग्रेस
  • 1990 रामलाल (जनता दल)
  • 1993 रामलाल, कांग्रेस
  • 1998 रामलाल, भाजपा
  • 2003 रोहित ठाकुर, कांग्रेस
  • 2007 नरेंद्र बरागटा, भाजपा
  • 2012 रोहित ठाकुर, कांग्रेस

इस बार भी मुकाबला इन्हीं दो चिर प्रतिद्वंद्वियों (भाजपा-कांग्रेस) के बीच है। इस विधानसभा क्षेत्र से तीसरे प्रत्याशी निर्दलीय लोकिंद्र झौहटा हैं। कांग्रेस के लिए यह सीट इस वजह से भी खास है क्योंकि 1985 में यहां से वीरभद्र सिंह विधायक रह चुके हैं हालांकि 1990 में जनता दल के उम्मीदवार के तौर पर राम लाल वीरभद्र सिंह को हरा चुके हैं। राम लाल इस क्षेत्र से 7 बार विधायक रह चुके हैं। एक बार को छोड़कर वे हर बार कांग्रेस के टिकट पर जीतते रहे हैं। वीरभद्र सिंह को हराने के बाद वे फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपना पूरा दमखम झोंक दिया है। प्रेम कुमार धूमल भी भाजपा के नरेंद्र बरागटा के पक्ष में रैली कर चुके हैं। कांग्रेस के रोहित ठाकुर के रैलियों में भी खबरों के मुताबिक भारी भीड़ उमड़ रही थी।

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