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शरद पवार ने किया खुलासा, क्यों NCP ने शिवसेना से मिलाया हाथ, भाजपा को सत्ता से रखा दूर

 Edited By: India TV News Desk
 Published : Jan 23, 2020 06:34 pm IST,  Updated : Jan 23, 2020 06:34 pm IST

राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों ने उनसे कहा था कि यदि उनकी पार्टी शिवसेना के साथ हाथ मिलाती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी लेकिन भाजपा को महाराष्ट्र में सत्ता से दूर रखा जाना चाहिए।

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मुम्बई: राकांपा प्रमुख शरद पवार ने बृहस्पतिवार को कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों ने उनसे कहा था कि यदि उनकी पार्टी शिवसेना के साथ हाथ मिलाती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी लेकिन भाजपा को महाराष्ट्र में सत्ता से दूर रखा जाना चाहिए।

शिवसेना और भाजपा ने गत वर्ष अक्टूबर में विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा था लेकिन मुख्यमंत्री का पद ढाई वर्ष बारी बारी से साझा करने के मुद्दे पर असहमति के चलते दोनों अलग हो गईं। शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस एकसाथ आईं और काफी विचार विमर्श के बाद राज्य में सरकार बनाई।

राकांपा के अल्पसंख्यक इकाई की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में पवार ने इस बारे में उल्लेख करते हुए कहा कि (उस समय) राज्य में तीन चार सप्ताहों से (शिवसेना-भाजपा) सरकार गठन की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा था। पवार ने कहा कि शिवसेना के साथ संभावित तालमेल के बारे में महाराष्ट्र के साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली के लोगों से सलाह ली गई थी।

पवार ने कहा, ‘‘हमें अल्पसंख्यकों की ओर से कहा गया कि यदि आप शिवसेना का साथ लेना चाहते हैं तो आप ऐसा कर सकते हैं लेकिन भाजपा को दूर रखिए। अल्पसंख्यकों ने उस कदम (शिवसेना को साथ लेने) का स्वागत किया।’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम ने देश को एक राह दिखाई है। उन्होंने इस पहल के लिए समुदाय की प्रशंसा की। पवार ने दावा किया कि अल्पसंख्यकों ने राज्य चुनाव में भाजपा के लिए वोट नहीं किया। उन्होंने कहा कि समुदाय के सदस्य जब कोई निर्णय करते हैं तो यह किसी पार्टी की हार सुनिश्चित करने के लिए होता है।

उन्होंने कहा कि राकांपा ने इस पर जोर दिया था कि राज्य सरकार में अल्पसंख्यक मामलों का विभाग कल्याणकारी कार्यों के लिए उनकी पार्टी को दिया जाना चाहिए। राकांपा नेता ने कहा कि नवाब मलिक राज्य के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री हैं। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ गत वर्ष 28 नवम्बर को ली थी। उन्होंने शुरू में छह मंत्रियों के साथ शपथ ली थी और मंत्रिपरिषद का विकास 30 दिसम्बर को किया गया।

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