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मालदीव के राष्ट्रपति ने बदला दशकों पुराना रिवाज, भारत को छोड़ पहुंचे तुर्की, आखिर क्या है मुइज्जू प्लान?

 Published : Nov 28, 2023 05:18 pm IST,  Updated : Nov 28, 2023 06:07 pm IST

ऐसा लगता है कि मालदीव के नवनियुक्त राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने इंडिया फर्स्ट की नीति से किनारा कर लिया है। वे मालदीव का दशकों पुराना रिवाज तोड़ते हुए तुर्की जा पहुंचे हैं।

Maldives, President- India TV Hindi
मालदीव के राष्ट्रपति पद की शपथ लेते हुए मोहम्मद मुइज्जू Image Source : PTI

नई दिल्ली:  मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने शपथ ग्रहण करने के बाद अपनी नीतियों में काफी बदलाव करना शुरू कर दिया है। इसका सीधा असर भारत और मालदीव के संबंधों पर भी पड़ रहा है। हालांकि भारत की ओर से दोनों देशों के संबंधों को यथावत रखने की पूरी कोशिश की जा रही है। लेकिन राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के रुख से भारत के इस प्रयास में फिलहाल उचित सफलता नजर नहीं आ रही है। मालदीव में नए राष्ट्रपति ने शपथ ग्रहण के साथ ही दशकों पुराना रिवाज तोड़ दिया है। वे अपनी पहली राजकीय यात्रा पर भारत नही आकर तुर्की गए हैं। इससे पहले मालदीव के राष्ट्रपति शपथ ग्रहण के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा पर भारत का दौरा करते रहे हैं। यह उनकी 'इंडिया फर्स्ट' नीति का हिस्सा भी रहा है। 

राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू चीन समर्थक नेता

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को चीन समर्थक नेता माना जाता है। उन्होंने चुनाव के दौरान भी अपना भारत विरोधी रुख जाहिर किया था। वे मालदीव में मौजूद भारतीय सैनिकों की टुकड़ी की वापसी भी चाहते हैं। चुनाव के दौरान और राष्ट्रपति की शपथ लेने के फौरन बाद उन्होंने इस पर अमल करना शुरू कर दिया है। मुइज्जू  सरकार भारत के साथ 100 से ज्यादा संबंधों की समीक्षा भी कर रही है। अब सवाल यह है कि उन्होंने पहली विदेश यात्रा के लिए तुर्की को ही क्यों चुना? दरअसल, तुर्की से भारत के बेहतर रिश्ते नहीं रहे हैं। तुर्की पाकिस्तान का करीबी है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तुर्की पाकिस्तान का समर्थन और भारत का विरोध करता रहा है। 

भारत पर निर्भरता को खत्म करना चाहते हैं मुइज्जू

दरअसल, मोहम्मद मुइज्जू का प्लान स्पष्ट नजर आ रहा है कि वो मालदीव की भारत पर निर्भरता को खत्म करना है। इसी उद्देश्य को लेकर राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले भी मुइज्जू विदेशों का दौरा करते रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने इंडिया फर्स्ट नीति से अलग अपना पहला दौरा तुर्की का किया। इस महीने उन्होंने यूएई का दौरा किया और माले एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए अबू धाबी से 80 मिलियन डॉलर के फंड मिलने का भरोसा लेकर आए। हलांकि इस प्रोजेक्ट के लिए भारत ने 136.6 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन दी थी। अब यूएई से 80 मिलियन डॉलर टॉप अप फंडिंग के आश्वासन का मतलब है कि मालदीव को दूसरी किश्त के लिए भारत पर निर्भर नहीं रहना होगा।

केंद्रीय मंत्री किरण रीजीजू शपथ ग्रहण समारोह में हुए थे शामिल

आपको बता दें कि मुइज्जू के शपथग्रहण समारोह केंद्रीय मंत्री किरण रीजीजू शामिल हुए थे। उन्होंने मुइज्जू से मुलाकात भी की थी। इसके बाद मुइज्जू के कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति ने बैठक में 'भारत सरकार से मालदीव से अपने सैन्यकर्मियों को वापस बुलाने का औपचारिक अनुरोध किया।' मुइज्जू ने कहा कि वह भारतीय सैन्यकर्मियों की मालदीव से वापसी का अपना चुनावी वादा निभाएंगे। बयान में कहा गया, 'बैठक में, राष्ट्रपति मुइज्जू ने औपचारिक रूप से भारत सरकार से मालदीव से अपने सैन्यकर्मियों को हटाने का अनुरोध किया।' इसमें कहा गया, 'राष्ट्रपति ने कहा कि सितंबर में हुए राष्ट्रपति चुनाव में मालदीव के लोगों ने इस संबंध में उन्हें भारत से अनुरोध करने के लिए मजबूत जनादेश दिया था और उम्मीद जताई कि भारत मालदीव के लोगों की लोकतांत्रिक इच्छा का सम्मान करेगा।' भारत सरकार के सूत्रों ने कहा कि बैठक में मुइज्जू ने चिकित्सा स्थिति में मरीजों को ले जाने तथा मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए मालदीव में विमान संचालन के वास्ते तैनात भारतीय सैन्यकर्मियों की मौजूदगी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने मालदीव के नागरिकों की चिकित्सा निकासी के लिए भारतीय हेलीकॉप्टरों और विमानों के योगदान को स्वीकार किया। 

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